Tuesday, 9 June 2020

मुख्तार माई




मुख्तार माई:-
1- एक ऐसी पाकिस्तानी औरत जिसके साथ 4 लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और 10 लोग खड़े होकर तमाशा देखते रहे।(सन् 2000 की घटना है)
2- सामूहिक बलात्कार इसलिए क्योंकि उनके भाई के ऊपर यह आरोप था कि उसने एक लड़की के साथ व्यभिचार किया है।
3- अतः खाप पंचायत ने शरियत कानून के हिसाब से फैसला सुनाया कि रेप का बदला रेप ही होगा।
4- दरअसल शरियत कानून के अनुसार अपराध 4 प्रकार के होते हैं-

हदूद (ईश्वर के विरुद्ध अपराध - चोरी, जिना - व्यभिचार आदि)
किसास (व्यक्तिगत अपराध - झगड़ा, मारपीट आदि)
सियासाह (सरकार के विरुद्ध अपराध)
ताजि़र (वे अपराध जिनके बारे शरियत या हदीस में उल्लेख नहीं है)

इसमें सबसे खतरनाक अपराध हदुद माना जाता है जिसमें भयानक सजा दी जाती है। चोरी के बदले हाथ काटना, जिना में पत्थर मारना, सिर के बदले सिर, आंख के बदले आंख, खून के बदले खून आदि।

सबसे दुखद पहलू यह है कि
1- अगर पुरुष व्यभिचार करता है तो उसका कोई खास जिक्र नहीं है। लेकिन
2- अगर स्त्री किसी पुरुष के ऊपर दुष्कर्म का आरोप लगाती है तो
• उसे चार चश्मदीद (प्रत्यक्ष रूप से देखने वाला) पुरुष गवाह लाना होगा (ध्यान रहे स्त्री की गवाही मान्य नहीं है)।
• यदि वह ऐसा करने में असफल होती है तब उसे जिना (व्यभिचार का दोषी) माना जायेगा। जिसकी सजा पत्थर मारना है।

निष्कर्ष यह है कि अगर किसी समाज में इस प्रकार के अतार्किक, अमानवीय कानून हैं जिन्हें अल्लाह या भगवान के कानून के तौर पर चलाया जा रहा है तो ऐसे अल्लाह या भगवान को हमें छोड़ देना चाहिए या जो किताबें ऐसा करने के लिये कहती हैं उन्हें जला देना चाहिए या फिर सभ्यता और मानवीयता का परिचय देते हुए खुद को बदलना चाहिये।

(इस घटना के बाद मुख्तार माई दुष्कर्म पीड़ितों, घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं और अशिक्षित महिलाओं की आवाज बन गयीं। इनके दसों स्कूल संचालित हो रहे हैं।)

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