Saturday, 13 June 2020

सभ्यताओं पर प्रश्न चिह्न


शास्त्रों में जिक्र आता है कि विकसित देव संस्कृति (आज से लगभग 5 हजार साल पुरानी सभ्यता) एक भयानक जलप्रलय के कारण नष्ट हो गयी। इसका वर्णन लगभग सभी धर्मों में है। इस महाप्रलय में केवल एक व्यक्ति (सुमेरियन सभ्यता के अनुसार उत्निपिशतिम, असीरियन सभ्यता के अनुसार जिउसुद्दू, हिंदू धर्मानुसार मनु, यहूदी, ईसाई और इस्लाम के अनुसार नूह) बचा। फिर उसने धीरे-धीरे दुनिया को नये सिरे से बसाना शुरू किया। संभव है उसने कुछ किताब आदि भी लिखा हो। उसके द्वारा तथा उसके बाद में लिखी किताबों से ही हमें प्राचीन सभ्यता का ज्ञान प्राप्त होता है।

सामान्यतया हम इन्हें कपोल-कल्पना या मिथक मानते हैं। जैसे-ब्रह्मास्त्र (वर्णन के आधार पर आज के परमाणु बम जैसा) ,आग्नेयास्त्र (मिसाइल जैसा), वरुणास्त्र (पानी बरसाने वाला अस्त्र) आदि या फिर पुष्पक विमान या पशु-पक्षियों का वाहन के रूप में उपयोग या राम, कृष्ण, एरिक, हरकुलिश, गिलगमेश, ओलंपस, ज्यूस, वीनस, आदि देवी-देवताओं की मौजूदगी, या जीन आनुवांशिकी से निर्मित संतान जैसे सीता या द्रोणाचार्य या गणेश का अंग प्रत्यारोपण या राम सेतु या द्वारिकापुरी, अटलांटिस, माया, वैदिक सभ्यता आदि। क्योंकि कोई विश्वासनीय प्रमाण न होने के कारण इन्हें सिद्ध नहीं किया जा सकता।"

अब अनुमान कीजिये कि अपनी वर्तमान सभ्यता जलवायु परिवर्तन से नष्ट हो गयी है। बचा है कोई एक आदमी। अब वह अपना पुराना इतिहास लिखता है। जिसमें है - परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, मशीनगन, तोप-जिससे बड़े से बड़े शहर को चंद सेकेंड में तबाह किया जा सकता है। सुपर या हाइपर सोनिक विमान, उड़ती कारें- जिससे आप मनवांछित जगह पर कभी भी आ जा सकते हैं। जेनेटिक्स सांइस- जिससे आप किसी प्राकृतिक वस्तु से कोई नयी और उससे अच्छी गुणवत्ता की वस्तु बना सकते हैं। बड़े - बड़े कारखाने जहाँ लाखों सामानों का उत्पादन कुछ घंटों में हो जाता है। इंटरनेट जिस पर कोई भी जानकारी कुछ सेकेंड में आपके सामने होती है, आप इस पर वर्चुअल मीटिंग कर सकते हैं। एक छोटी सी चिप जिसमें हम लाखों टेराबाइट डाटा स्टोर कर सकते हैं। क्वांटम फिजिक्स जिसके द्वारा आदमी टाइम ट्रेवल कर सकता है। आतंकवादी, नक्सलवादी जिन्होंने लोगों को बेरहमी से मारा आदि।

क्या उस व्यक्ति के बाद की पीढ़ी इन चीजों को सत्य मान पायेगी? क्या वह कल्पना भी कर सकती है कि कभी ऐसा भी कुछ रहा होगा? क्योंकि इस विनाश के बाद तो आगामी सभ्यता फिर से आदिम युग में चली जायेगी। फिर वही नंग धडंग आदमी, आखेट से भोजन, और गुफाओं में रहना।

क्या शिकार के लिये दिनभर दौड़ लगाने वाला आदमी यह सोच सकता है कि कभी घर बैठकर स्विगी या जोमैटो से खाना आर्डर होता था? या एक दिन के बाद सड़ा हुआ बदबूदार मांस देखकर वह आदमी मान सकता है कि कभी रेफ्रिजरेटर भी हुआ करता था जिसमें आप हफ्तों खाना स्टोर कर सकते थे? या दिन-रात धूप, बरसात और सर्दी सहने वाला आदमी सोचेगा कि कभी एसी, कूलर या नरम और गरम कपड़े भी हुआ करते थे? मुझे लगता है शायद नहीं। वह भी हमारी तरह (जैसा कि हम अपनी पूर्व की सभ्यताओं को कल्पना मानते हैं) हमारी सभ्यता को भी कल्पना और मिथक ही मानेगा।

©विन्ध्येश्वरी

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