Wednesday, 17 June 2020

स्त्री का स्वभाव


स्त्री के स्वभाव को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है, खासकर पुरुष के लिए। क्यों? दो कारण है-

1- प्रकृति ने स्त्री को पूर्ण गुणसूत्र से निर्मित किया है जबकि पुरुष को अपूर्ण। इस अंतर के कारण स्त्री स्थिर चित्त हो जाती है जबकि पुरुष हमेशा अस्थिर चित्त बना रहता है। अस्थिर चित्त व्यक्ति के लिये स्थिर चित्त व्यक्ति को समझना कठिन हो जाता है। जैसे किसी सिद्ध महात्मा (जो स्थिर चित्त हो चुका है- कबीर की बानी) की बात को समझना सामान्य आदमी के लिये कठिन होता है।

2- स्त्री का अवचेतन मन काफी सक्रिय होता है जबकि पुरुष का चेतन मन सक्रिय होता है। इस अंतर के कारण स्त्री मन के तीसरे तल से सोचती है जबकि पुरुष मन के पहले तल पर ही सोच पाता है। मन का पहला तल तर्क प्रधान है जबकि तीसरे तल पर तर्क की कोई गुंजाइश नहीं है, वहां सीधे फैसला होता है। इसका नतीजा यह होता कि जब तक पुरुष तर्क करने में उलझा रहता है तब तक स्त्री निष्कर्ष और निर्णय तक पहुंच जाती है। इसीलिए पुरुष को स्त्री की समझ में नहीं आती।

©विन्ध्येश्वरी

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