Friday, 26 January 2018
आसियान
उद्देश्य :- आर्थिक-सामाजिक विकास के साथ सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती के लिए
स्थापना :- 8 अगस्त 1967
सदस्य देश:- दक्षिण-पूर्व एशिया के पांच देशों इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने मिलकर एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) स्थापना किया। बाद में ब्रुनई, कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस को मिलाकर इसके सदस्य देशों की संख्या 10 हो गई है।
आसियान प्लस :- वर्ष 1977 के एशियाई आर्थिक संकट के दौरान थाईलैंड में हुई बैठक में इस संगठन में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को मिलाकर आसियान प्लस नामक मंच का गठन किया गया। बाद में ईस्ट एशिया समिट के बैनर तले भारत, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया को भी इसमें शामिल कर लिया गया। इस तरह आसियान प्लस नामक मंच अस्तित्व में आया। अमेरिका और रूस भी जुड़े वर्ष 2011 में छठे ईस्ट एशिया समिट में आसियान को और विस्तार देते हुए इसमें अमेरिका और रूस को भी शामिल कर लिया गया।
शिखर सम्मेलन:- आसियान नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन इंडोनेशिया के बाली में 1976 में हुआ था।
मनीला में 1987 में हुए शिखर सम्मेलन में हर पांच साल बाद बैठक का फैसला लिया गया, लेकिन 1992 में सिंगापुर में तय किया गया कि इसके शीर्ष नेता हर 3 साल बाद मिलेंगे। वर्ष 2011 में हर साल सम्मेलन करने का फैसला किया गया। वर्ष 2008 में आसियन चार्टर के अस्तित्व में आने के बाद हर दो साल बाद शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाता है।
क्षेत्रफल :- 44 लाख वर्ग किलोमीटर (जो धरती के क्षेत्रफल का तीन फीसदी)
कुल आबादी :- 64 करोड़ (दुनिया की कुल आबादी का 8.8 फीसदी)
दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था:- वर्ष 2015 के आंकड़ों के अनुसार इन देशों की सम्मिलित जीडीपी 2.8 लाख करोड़ डॉलर है। इस लिहाज से यह अमेरिका, चीन, जापान, फ्रांस, और जर्मनी के बाद सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
Wednesday, 24 January 2018
यू पी एस सी की तैयारी कैसे करें
सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए कुछ दार्शनिक के महत्वपूर्ण वक्तव्य
UPSC की तैयारी कैसे करे ?
UPSC की तैयारी कैसे करे ?
It’s a funny thing, the more I practice the luckier I get.
Arnold Palmer
Arnold Palmer
अर्थात आप जितना रिविज़न करेंगे और टेस्ट देंगे आपके प्रीलिम्स पास करने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी ।
If I had eight hours to chop down a tree, I’d spend six sharpening my ax.
Abraham Lincoln
Abraham Lincoln
अर्थात प्रीलिम्स से पूर्व ज्यादा से ज्यादा टेस्ट पेपर का अभ्यास करे ।
Do what you can with what you have where you are.
Theodore Roosevelt
Theodore Roosevelt
अर्थात तैयारी के लिए दिल्ली ,इलाहाबाद जैसे शहरों में जाने की कोई आवश्यकता नही है। इन्टरनेट के इस दौर में कुछ अच्छी पुस्तक ही आपका सबसे बड़ा साथी है। यदि आप के पास कोचिंग के नोट्स नही है तो ये आपके लिए खुशखबरी है क्योंकि तभी आप अपना नोट्स बना पाएंगे।
Do not confuse motion and progress. A rocking horse keeps moving but does not make any progress.
Alfred A. Montapert
Alfred A. Montapert
अर्थात आप जो पढ़ते है उसे समझने की कोशिश कीजिए। आप किसी और के लिए नही पढ़ रहे है कि अरे आज मैंने 12 घंटे पढाई की। आप 6 घंटे ही पढ़े लेकिन चीज़ों को समझे सिर्फ पेज न पलटे क्योंकि…
Knowledge becomes wisdom only after it has been put to practical use.
अर्थात CSAT के पेपर को आप परीक्षा में तभी हल कर सकते है जब आप ने घर पर पहले वैसे प्रश्नों को हल किया हो।
You gain strength, courage, and confidence by every experience in which you really stop to look fear in the face. You must do the thing which you think you cannot do.
Eleanor Roosevelt
Eleanor Roosevelt
जब भी आप कोई नए कांसेप्ट को समझते है तो पहली बात दिमाग में यही आती है कि भाई ये मुझसे न हो पाएगा ,लेकिन बार बार पढ़ने और समझने के बाद आपका वो टॉपिक आपका अपना हो जाता है और आप उस टॉपिक में कॉन्फिडेंट हो जाते है।
Obstacles don’t have to stop you. If you run into a wall, don’t turn around and give up. Figure out how to climb it, go through it, or work around it.
Michael Jordan
Michael Jordan
यदि आप ‘दोहरे तुलना पत्र कि चुनौती’जैसे किसी टॉपिक को समझने में असमर्थ है तो कम से कम इसके बारे में बेसिक जानकारी ज़रूर देख ले।नही जानने से अच्छा कुछ जानना होता है।
Do not wait for extrordinary circumstances to do good;
try to use ordinary situations.
Jean Paul Richter
try to use ordinary situations.
Jean Paul Richter
ये लाइन उनके लिए है जो कभी भी कर्रेंट का नोट्स नही बनाते , और सोचते है कि परीक्षा से पूर्व कोई अच्छी कर्रेंट कि पुस्तक खरीद कर सब पढ़ लेंगे। ऐसा नही होता है …किसी भी वेबसाइट पर दिया गया नोट्स या कोई भी कर्रेंट की पुस्तक सिर्फ इसलिए होती है कि यदि आप के अपने नोट्स में कोई टॉपिक छूट गया है तो आप उसे जोड़ ले। इस परीक्षा में आपका साथी सिर्फ आप है ,इसीलिए पेपर पढ़े और नोट्स बनाए। इसका कोई और विकल्प नही है।
Don’t be afraid to give your best to what seemingly are small jobs. Every time you conquer one it makes you that much stronger. If you do the little jobs well, the big ones will tend to take care of themselves.
Dale Carnegie
Dale Carnegie
अर्थात आप जो कुछ भी पढ़ते है उसके मूल अवधारणा को समझने कि सर्वप्रथम कोशिश करे।
निरंतरता
जब ये सवाल पूछा जाता है कि सफलता के लिए क्या आवश्यक है ?
जब ये सवाल पूछा जाता है कि सफलता के लिए क्या आवश्यक है ?
कुछ कहते है कि लोगों का attitude उन्हें सफल बनाता है , कुछ कहते है कि दृढ संकल्पित सफल होते है ,कुछ कहते है कि जिनके अंदर निरंतरता है वो सफल होते है… । मुझे लगता है कि सफलता के लिए ये सारी चीज़े आवश्यक है लेकिन सबसे आवश्यक निरंतरता है क्योंकि
slow and steady wins the race
slow and steady wins the race
ये हो सकता है कि आपको धीरे – धीरे निरंतर प्रयास करके सफल होने में थोड़ा वक़्त ज्यादा लग जाए लेकिन आप सफल ज़रूर होंगे क्योंकि
It does not matter how slowly you go as long as you do not stop.
Confucius
Confucius
Be like a postage stamp. Stick to one thing until you get there.
Josh Billings
Josh Billings
समय प्रबंधन
समय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत से अभ्यर्थी तैयारी के दौरान बहुत से समय ये सोचते सोचते बिता देते है कि IAS /IPS बनने के बाद क्या करेंगे
समय प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत से अभ्यर्थी तैयारी के दौरान बहुत से समय ये सोचते सोचते बिता देते है कि IAS /IPS बनने के बाद क्या करेंगे
Time is the coin of your life. It is the only coin you have,
and only you can determine how it will be spent.
Be careful lest you let other people spend it for you.
Carl Sandburg
and only you can determine how it will be spent.
Be careful lest you let other people spend it for you.
Carl Sandburg
अर्थात दूसरे लोगों का आप अपना समय व्यर्थ न करने दे खासकर फेसबुक व व्हाट्सएप्प जैसे चीज़ों में। इस तरह के ग्रुप में कभी कभी आपको कुछ नोट्स मिल सकता है जिसे आप डाउनलोड कर ले।और फ़र्ज़ी चीज़ों में वक़्त बर्बाद न करे।
If you can’t sleep, then get up and do something instead of lying there worrying.
Dale Carnegie
Footprints on the sands of time are never made by sitting down.
Unknown
Dale Carnegie
Footprints on the sands of time are never made by sitting down.
Unknown
The future depends on what we do in the present.
Mahatma Gandhi
Mahatma Gandhi
A loser seldom lives in the present, but instead destroys the present by focusing on past memories or future expectations.
Muriel James
Muriel James
Tomorrow is the most important thing in life. Comes into us at midnight very clean. It’s perfect when it arrives and it puts itself in our hands. It hopes we’ve learned something from yesterday.
John Wayne
John Wayne
He who seeks rest finds boredom… He who seeks work finds rest.
Unknown
Unknown
Inaction breeds doubt and fear. Action breeds confidence and courage. If you want to conquer fear, do not sit home and think about it. Go out and get busy.
Dale Carnegie
Dale Carnegie
बहाना बनाने से बचे
जब भी टेस्ट में कम नंबर आता है या हम प्रीलिम्स फ़ैल हो जाते है तो हम अपनी तैयारी कि गलतियों को न देखकर और सारी चीज़ों को इसके लिए ज़िमेद्दार ठहराते है। हम बहाना बना कर दो चार लोगों को समझा देंगे कि इस असफलता में मेरी कोई गलती नही है हालात ही ऐसा था , लेकिन क्या हम अपने आप को समझा पाएंगे ?
जब भी टेस्ट में कम नंबर आता है या हम प्रीलिम्स फ़ैल हो जाते है तो हम अपनी तैयारी कि गलतियों को न देखकर और सारी चीज़ों को इसके लिए ज़िमेद्दार ठहराते है। हम बहाना बना कर दो चार लोगों को समझा देंगे कि इस असफलता में मेरी कोई गलती नही है हालात ही ऐसा था , लेकिन क्या हम अपने आप को समझा पाएंगे ?
An excuse is worse and more terrible than a lie; for an excuse is a lie guarded.
Alexander Pope
Because
Niney-nine percent of failures come from people who have the habit of making excuses.
George W. Carver
Alexander Pope
Because
Niney-nine percent of failures come from people who have the habit of making excuses.
George W. Carver
Never let your head hang down. Never give up and sit down and grieve. Find another way. And don’t pray when it rains if you don’t pray when the sun shines.
Satchel Paige
Satchel Paige
ईर्ष्या
जब भी आप किसी क्लास या ग्रुप में पढाई करते है तो आप ऐसे लोगो से ईर्ष्या करने लग जाते है जिन्हें किसी टेस्ट में आप से अधिक नंबर प्राप्त हुआ है ,या आप परीक्षा के किसी स्तर पर असफल हो गए हो और किसी को UPSC में सफलता मिल गई हो।ऐसे समय में कभी भी अपना धीरज न खोए और हमेशा याद रखे कि
जब भी आप किसी क्लास या ग्रुप में पढाई करते है तो आप ऐसे लोगो से ईर्ष्या करने लग जाते है जिन्हें किसी टेस्ट में आप से अधिक नंबर प्राप्त हुआ है ,या आप परीक्षा के किसी स्तर पर असफल हो गए हो और किसी को UPSC में सफलता मिल गई हो।ऐसे समय में कभी भी अपना धीरज न खोए और हमेशा याद रखे कि
If you envy successful people, you create a negative force field of attraction that repels you from ever doing the things that you need to do to be successful. If you admire successful people, you create a positive force field of attraction that draws you toward becoming more and more like the kinds of people that you want to be like.
Brian Tracy
Brian Tracy
When you are content to be simply yourself and
don’t compare or compete, everybody will respect you.
Lao-Tzu
don’t compare or compete, everybody will respect you.
Lao-Tzu
Every artist was first an amateur.
Ralph Waldo Emerson
Ralph Waldo Emerson
अर्थात यदि आप ये नही जानते कि पानीपत कि पहली लड़ाई कब हुई तो कोई बात नही आप उसके जबाब खोजिए क्योंकि जो आपके साथी ये जानते है कुछ समय पहले उन्होंने भी इसका जबाब खोज होगा
Did you ever see an unhappy horse? Did you ever see bird that had the blues? One reason why birds and horses are not unhappy is because they are not trying to impress other birds and horses.
Dale Carnegie
Dale Carnegie
No one can make you feel inferior without your consent.
– Eleanor Roosevelt
– Eleanor Roosevelt
Don’t worry over what other people are thinking about you.
They’re too busy worrying over what you are thinking about them.
Unknown
They’re too busy worrying over what you are thinking about them.
Unknown
प्रीलिम्स / मेंस या साक्षात्कार में असफलता
Insanity: doing the same thing over and over again and expecting different results.
Albert Einstein
Albert Einstein
अर्थात यदि आप असफल हो रहे है तो आप अपने पढाई के तरीके में परिवर्तन लाइए| यदि आपको लगता है कि 2 महीने 8 घंटे पढ़ने से प्रीलिम्स पास कर जाएंगे ,तो फिर आप 3 महीने 10 घंटे पढाई करे ,इससे आप के सफल होने में जो थोड़ा बहुत संदेह होगा वो भी दूर हो जाएगा
If you keep on doing what you’ve always done,
you’ll keep on getting what you’ve always got.
W.L. Bateman
you’ll keep on getting what you’ve always got.
W.L. Bateman
बहुत सारे अभ्यर्थी पहले प्रयास में सफल नही हो पाते है इसके लिए तनाव में आने कि आवश्यकता नही है क्योंकि
If you believe that feeling bad or worrying long enough will change
a past or future event, then you are residing on another planet with
a different reality system.
Unknown
a past or future event, then you are residing on another planet with
a different reality system.
Unknown
Failure will never overtake me if my determination to succeed is strong enough.
Og Mandino
Remember that failure is an event, not a person.
Unknown
Og Mandino
Remember that failure is an event, not a person.
Unknown
If something is wrong, fix it if you can. But train yourself not to worry.
Worry never fixes anything.
Mary Hemingway
Worry never fixes anything.
Mary Hemingway
इतिहास का उदहारण देने वालों के लिए
An age is called Dark Age, not because the light fails to shine,
but because people refuse to see it.
James Michener
but because people refuse to see it.
James Michener
और अंततः
Twenty years from now you will be more disappointed by the things you didn’t do than by the ones you did. So throw off the bowlines.
Sail away from the safe harbor. Catch the trade winds in your sails.
Explore. Dream. Discover.
Mark Twain
Sail away from the safe harbor. Catch the trade winds in your sails.
Explore. Dream. Discover.
Mark Twain
(फेसबुक ग्रुप मिशन यू पी एस सी से साभार)
आई- क्रिएट (iCreate)
आई- क्रिएट (iCreate)
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और उनके इज़रायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा अहमदाबाद स्थित iCreate सुविधा iCreate facility केंद्र को देश को समर्पित किया गया।
iCreate एक स्वतंत्र केंद्र है जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, जल, कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, जैव-चिकित्सकीय उपकरणों तथा तंत्रों जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करने हेतु रचनात्मकता, नवाचार, इंजीनियरिंग, उत्पाद डिज़ाइन और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के मिश्रण के माध्यम से उद्यमशीलता को सुविधाजनक बनाना है।
इसके अंतर्गत भारत में एक ऐसे माहौल को विकसित करने पर बल दिया जाता है जिसमें गुणवत्तायुक्त उद्यमियों को आधार प्रदान करने के साथ-साथ सशक्त बनाया जा सके।
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और उनके इज़रायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा अहमदाबाद स्थित iCreate सुविधा iCreate facility केंद्र को देश को समर्पित किया गया।
iCreate एक स्वतंत्र केंद्र है जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, जल, कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, जैव-चिकित्सकीय उपकरणों तथा तंत्रों जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करने हेतु रचनात्मकता, नवाचार, इंजीनियरिंग, उत्पाद डिज़ाइन और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के मिश्रण के माध्यम से उद्यमशीलता को सुविधाजनक बनाना है।
इसके अंतर्गत भारत में एक ऐसे माहौल को विकसित करने पर बल दिया जाता है जिसमें गुणवत्तायुक्त उद्यमियों को आधार प्रदान करने के साथ-साथ सशक्त बनाया जा सके।
Tuesday, 23 January 2018
एक बार पढ़ें और जीवनभर कैसे याद (स्मरण) रखें !
लगभग सभी दोस्तों की शिकायत यही होती है कि वह पढ़ते हैं परन्तु परीक्षा तक सब पढ़ा हुआ विस्मृत (भूल) हो जाता है। ऐसा लगता है कि यह पढ़ा हुआ है पर लिखना क्या है याद ही नहीं आता। ऐसे में वर्षभर की पढ़ाई बेकार हो जाती है और आप परीक्षा में वांछित अंक नहीं प्राप्त कर पाते। इससे आप में नैराश्य की भावना (निगेटिविटी) प्रबल होने लगती है और आप अवसाद की तरफ बढ़ने लगते हैं।
प्रतियोगी परीक्षा में महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने कितनी पुस्तकें पढ़ी है या आपको कितना ज्ञान है। परीक्षक को आपके ज्ञान का तनिक भी अंदाजा नहीं होता वह आपका मूल्यांकन आपके द्वारा प्रदत्त उत्तर/आंसर शीट के माध्यम से करता है। अगर आपने वहां अच्छा प्रदर्शन किया है तो आप उसकी नजर में अधिकतम अंक पाने योग्य हैं अन्यथा आप औसत अंक या उससे भी कम अंक पाने योग्य होंगे।
ऐसे में सभी उम्मीदवारों के समक्ष यह प्रश्न लाजिमी है कि हम एक बार पढ़ी हुई अध्ययन सामग्री कैसे याद रखें। जो टॉपर होते हैं वह कैसे अच्छा उत्तर लेखन या निश्चित समय में अधिकतम प्रश्न मैक्सिमम एक्यूरेसी (अधिकतम विशुद्धता) के साथ हल कर लेते हैं। क्या स्मरण रखने (याद रखने) के लिए भी टिप्स होते हैं जिनके माध्यम से आप अध्ययन सामग्री को अधिकतम समय तक स्मरण रख सकते हो। आज हम आपसे इसी बात पर चर्चा करेंगे जिससे हम सब प्रतियोगी परीक्षा में अधिकतम प्रश्न हल कर अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकें।
तो आईये अब बढ़ते हैं अपनी ‘स्मरण क्षमता’ बढ़ाने के टिप्स की तरफ जिससे आपको एक बार पढ़ा हुआ आजीवन याद रहें और आप ज्ञान का उपयोग कर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
स्मरण शक्ति बढ़ाने के टिप्स
प्रतियोगी परीक्षा में महत्त्वपूर्ण यह नहीं है कि आपने कितनी पुस्तकें पढ़ी है या आपको कितना ज्ञान है। परीक्षक को आपके ज्ञान का तनिक भी अंदाजा नहीं होता वह आपका मूल्यांकन आपके द्वारा प्रदत्त उत्तर/आंसर शीट के माध्यम से करता है। अगर आपने वहां अच्छा प्रदर्शन किया है तो आप उसकी नजर में अधिकतम अंक पाने योग्य हैं अन्यथा आप औसत अंक या उससे भी कम अंक पाने योग्य होंगे।
ऐसे में सभी उम्मीदवारों के समक्ष यह प्रश्न लाजिमी है कि हम एक बार पढ़ी हुई अध्ययन सामग्री कैसे याद रखें। जो टॉपर होते हैं वह कैसे अच्छा उत्तर लेखन या निश्चित समय में अधिकतम प्रश्न मैक्सिमम एक्यूरेसी (अधिकतम विशुद्धता) के साथ हल कर लेते हैं। क्या स्मरण रखने (याद रखने) के लिए भी टिप्स होते हैं जिनके माध्यम से आप अध्ययन सामग्री को अधिकतम समय तक स्मरण रख सकते हो। आज हम आपसे इसी बात पर चर्चा करेंगे जिससे हम सब प्रतियोगी परीक्षा में अधिकतम प्रश्न हल कर अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकें।
तो आईये अब बढ़ते हैं अपनी ‘स्मरण क्षमता’ बढ़ाने के टिप्स की तरफ जिससे आपको एक बार पढ़ा हुआ आजीवन याद रहें और आप ज्ञान का उपयोग कर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
स्मरण शक्ति बढ़ाने के टिप्स
रुचिकर (Interesting):-
सभी विद्यार्थी एक ही स्कूल/कॉलेज/कोचिंग में एक ही अध्यपाक से विषय विशेष की पढ़ाई करते हैं, पर कुछ विद्यार्थी पढ़ाया हुआ सब कुछ याद रखते हैं और कुछ को कुछ भी याद नहीं रख पाता। हो सकता है हम वह विद्यार्थी हों, जिन्हें कुछ याद रह जाता है या कुछ भी याद नहीं रहता। आइए अब इसका कारण जानते हैं, कि ऐसा क्यों हुआ?
दोस्तों उत्सुकता और रुची आपके पढ़े हुए को याद रखने के लिए आवश्यक घटक है। हम जो कुछ भी करते है या पढ़ते हैं यदि हमें उसमें उत्सुकता या रुची न हो तो हम चाहे कितने भी पढ़े या याद करे कुछ समयपश्चात ही हम वह पढ़ा हुआ भूल जाएंगे इसलिए हम जो कुछ भी यदि याद करना चाहते है उसमे हमे अपनी उत्सुकता बनाना बहुत जरुरी होता है यदि हम जो कुछ भी पढ़ते है उसे खूब मन लगाकर रुची के साथ याद करे तो निश्चित ही जल्द ही याद कर सकते है।
ध्यान (Attention):-
दोस्तों अपने पाठ्यक्रम के विषय को याद करने के लिए उसमे अपना ध्यान केन्द्रित करना बहुत ही आवश्यक होता है जब हम कभी भी पढ़े तो आस-पास ऐसी चीजे नही होनी चाहिए जिससे की हमारा ध्यान पाठ्य-पुस्तक से भटके इसलिए जो भी पढ़े और पूरी तन्लीनता के साथ पढ़े।
एकाग्रता (Concentrate of Mind):-
जब हम पढ़ रहे हों या याद कर रहे हों तो अपने दिमाग में अन्य चीजे आने का अवसर नहीं प्रदान करना चाहिए अथार्त ख्याली-पुलाव/सपने में गुम नहीं होना चाहिए।क्योंकि सपने तभी सच होते हैं जब हम एकाग्र होकर कठिन परिश्रम द्वारा अध्ययन करते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य मार्ग नहीं है। जब हम सपने देखते हुए पढ़ते हैं तो हमारी नजर तो पुस्तक पर होती है पर दिमाग सपने पर होता है, इसलिए उस समय पढ़ा हुआ कुछ याद नहीं रहता।
अच्छा वातावरण (Good Environment) :-
जब आप अध्ययन करें तो यह प्रयास करें कि आपका अध्ययन कक्ष एकदम शांत रहें, बाहर का भी शोर भी आपको सुनाई न पड़े। पढ़ते समय आप फ़ोन/टीवी से भी दूरी रखें। जिससे हमारा ध्यान न भटके और हम एकाग्र होकर पढ़ सके।
स्वास्थ्य (Good Health):-
स्वास्थ्य (Good Health):-
दोस्तों स्वस्थ शरीर स्वच्छ दिमाग का घर होता है यानी दोस्तों जब हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है तो हमारे मन में अच्छी-अच्छी बातें भी आती है इसलिए हम सभी को अपने पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरुरी होता है फिर जब हम स्वस्थ होंगे तो जो कुछ भी याद करेगे वो हमारे मस्तिष्क में जल्दी से स्टोर हो जायेगा जिसे हम जल्दी नही भूल सकते है।
अपने अध्ययन याद करने के लिए क्या करे?
सर्वप्रथम पाठ्य सामग्री को समझे- आप जो भी पढ़ रहे हैं उसे याद रखने के लिए सबसे आवश्यक है कि आप उसे समझ पा रहे हैं। आप पाठ को तभी उचित ढंग से समझ पाएंगे जब आप पाठ्य में प्रयुक्त पारिभाषिक शब्दावली से परिचित हों और प्रत्येक वाक्य का अर्थ भी आपकी समझ में आ रहा हो। और आप उसे याद भी तब रख पाएंगे जब उसका उपयोग आप अपने जीवन में समझ पाएंगे। अगर आपको पता होगा कि tan 45˚ का मान की समझ होगी, और एक भुजा का मान दिया गया हो तो आपको दूसरी भुजा का मान निकालने में कोई परेशानी नहीं होगी।
बोलकर पढ़ें – जब हम एक ही रूटीन से पढ़ते हैं तो भी हमें उस चीज में रुची कम होने लगती हैं और कुछ समय बाद हमें नींद आने लगती हैं। यह समस्या काफी उम्मीदवारों में देखि जाती हैं। तो अपने अध्ययन में रुची विकसित करने के लिए और नींद को भी दूर करने के लिए आप बोलकर पढ़ सकते हैं। काफी विद्यार्थी बोलकर पढ़ते हैं तो उन्हें शीघ्र याद हो जाता हैं, इसके पीछे लॉजिक हैं यदि आप प्राचीन समय को देखें तो लोग श्रवण-मनन (बोलकर-मंथन कर) अध्ययन करते थें। और वह ज्ञान को ऐसे ही सीखते थे तो यह विधि भी आपको देर तक पढ़ने और याद रखने में मदद कर सकती हैं।
पहले पाठ्य को समझे फिर याद करें – आपको शब्द, संख्या के आधार पर एक प्रतीकात्मक कहानी विकसित करनी हैं और उसे अपने आप पर आरोपित करना है और आप इसे जितना महसूस कर सकोगे या जितने अच्छे से इमेजिन करोगे और एक्सपीरियंस करोगे वह तथ्य आपको उतनी ही आसानी से याद हो जाएगा। अथार्त आपको शब्द और संख्या को पिक्चर में बदल कर याद करना है। महत्त्वपूर्ण तिथियों, घटनाओं को स्मरण रखने के लिए ट्रिक बनाएं और इसे ट्रिक्स से याद रखें। पढ़ाई सामग्री में तारतम्य बनाएं एक घटना को दूसरे घटना से जोड़े तभी आप बुनियादी समझ विकसित कर निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं। जब आप सिन्धु सभ्यता को पढ़ लेते हो और फिर वैदिक सभ्यता का अध्ययन करते हों तो आपको एक गैप नजर आता है। जो आपको इतिहास की वास्तविक समझ और उसकी महत्त्वा समझने में सहायता करती है।
हमारा दिमाग विजुअल की हुई चीजों को अधिक समय तक याद रखता है, इसलिए आपको मूवी याद नहीं करनी पड़ती और आप हु-ब-हु याद रख पाते हों। जब आप पढ़ाई में भी इस तरीके का प्रयोग करते हों तो आप हर जानकारी को नए तरीके से स्टोर करते हों और आपका दिमाग उसे आसानी से स्टोर कर लेते है। और याद की हुई प्रत्येक तथ्य को याद रखने में समर्थ होने लगते हों-
हर-बार ग़ालिब एक ही गलती करता रहा
धुल चेहरे पर थी, वह आईना साफ़ करता रहा
आपको याद नहीं हो रहा तो उसके पीछे पड़ने की जरुरत नहीं है बल्कि याद करने के तरीके को बदलने की जरुरत है, जब आप तरीका बदलेंगे तो आप पाएंगे आप अब समझने और याद करने में कैसे सफल हो रहे हैं। तो अपना तरीका बदलो और सब कुछ याद रखों। अपनी पढ़ाई में उत्सुकता बनानी चाहिए और पढ़ाई करने के नियम हमे खुद से बनाने चाहिए की कब क्या कौन सा विषय पढ़ना है और हमें पढ़ाई में मन लगाने के उपाय पर जरूर अमल करना चाहिए।
गणित और विज्ञान रटने से अच्छा है हमे उनके फार्मूला याद करना चाहिए और वे फार्मूला किस प्रकार काम करते है ये समझना बहुत जरुरी होता है। गणित के फ़ॉर्मूले आपको अभ्यास करते-करते स्वतः ही याद हो जाते हैं। इतिहास और राजनीति विज्ञान के तिथियाँ और अनुच्छेद याद रखने के लिए शार्टट्रिक का प्रयोग करें।
पढ़ा हुआ लिखें –आपने जब कोई पाठ पढ़ा तो पुस्तक बंद कर उसे लिखें और बाद में उसे मिलाएं और हुई गलती को देखें और फिर से पाठ पढ़कर यह प्रक्रिया तब तक दुहराएं जब तक आपको याद न हो जाए और आप पढ़े हुए तथ्यों को सही तरीके से लिख न सकें। जब हम लिखकर कोई भी चीज याद करेगे तो वो चीजे जल्दी याद होंगी। जब चीजे याद हो जाए तो उसका नोट्स भी बना लें। फिर चाहें तो उसका ऑडियो भी रिकॉर्ड कर सुन सकते हैं, यह भी आपको याद करने में सहायता करेगा।
प्रतिदिन आधार पर अध्ययन करें खुद से प्रश्न पूंछे – जो कुछ भी याद करे उसे प्रतिदिन आधार पर एक-एक पाठ के रूप में याद करना चाहिए। अगर एक दिन में सारी पुस्तक को ख़त्म करने बठेंगे तो कुछ भी याद नही होगा और जो कुछ भी याद रहेगा उसे भी भूलने का डर रहता है यानी पढ़ाई करने के नियम हमे अच्छे से फॉलो करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आपने जो पाठ उससे सम्बंधित कुछ प्रश्न मन में सोंचे और उसके उत्तर दें, यह प्रक्रिया आपके दिमाग को काफी तेज कर देता हैं और आपके उत्तर देने के कौशल को भी निखारता है।
रिविजन अवश्य करें – टाइम टेबल में पुनरावृत्ति के लिए पर्याप्त वक्त रखें, जिससे आखिरी समय में परेशानी न हो। जैसे ही कोचिंग समाप्त होती है अपने क्लास नोट्स की पुनरावृत्ति कर लें। अगर आप कोचिंग नहीं लेते तो कल के पढ़ें हुए अध्ययन को दोहरा लें और फिर नया अध्ययन करें। दोहराने की प्रक्रिया अगले दिन अध्ययन शुरू होने से पहले और फिर सप्ताह के अंत में और फिर महीने भर में जितना पढ़ा उसे दुहराने की होनी चाहिए। अलग-अलग तरीकों से पुनरावृत्ति करें ताकि आपको पढ़ने में भी मजा आए। इससे आप पढ़ी हुए सामग्री को भूलेंगे नहीं। कई बार दूसरों के साथ अध्ययन करने पर आप यह जान सकते हैं कि विषय को पूरी तरह से समझ पायें हैं या नहीं। यदि आपने प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं और उसे आप दूसरों को अच्छी तरह समझा पाने में सफल हो गए तो समझिए कि आपके द्वारा अध्ययन किये गए विषय को आपने आत्मसात कर लिया। वरना आप महसूस करेंगे कि अभी कुछ और मेहनत करना जरूरी है। तो दोस्तों हम जो कुछ भी याद करे उसे बार बार दोहराते जरुर रहे तो हम कभी भी उसे भूल नही सकते।
धुल चेहरे पर थी, वह आईना साफ़ करता रहा
आपको याद नहीं हो रहा तो उसके पीछे पड़ने की जरुरत नहीं है बल्कि याद करने के तरीके को बदलने की जरुरत है, जब आप तरीका बदलेंगे तो आप पाएंगे आप अब समझने और याद करने में कैसे सफल हो रहे हैं। तो अपना तरीका बदलो और सब कुछ याद रखों। अपनी पढ़ाई में उत्सुकता बनानी चाहिए और पढ़ाई करने के नियम हमे खुद से बनाने चाहिए की कब क्या कौन सा विषय पढ़ना है और हमें पढ़ाई में मन लगाने के उपाय पर जरूर अमल करना चाहिए।
गणित और विज्ञान रटने से अच्छा है हमे उनके फार्मूला याद करना चाहिए और वे फार्मूला किस प्रकार काम करते है ये समझना बहुत जरुरी होता है। गणित के फ़ॉर्मूले आपको अभ्यास करते-करते स्वतः ही याद हो जाते हैं। इतिहास और राजनीति विज्ञान के तिथियाँ और अनुच्छेद याद रखने के लिए शार्टट्रिक का प्रयोग करें।
पढ़ा हुआ लिखें –आपने जब कोई पाठ पढ़ा तो पुस्तक बंद कर उसे लिखें और बाद में उसे मिलाएं और हुई गलती को देखें और फिर से पाठ पढ़कर यह प्रक्रिया तब तक दुहराएं जब तक आपको याद न हो जाए और आप पढ़े हुए तथ्यों को सही तरीके से लिख न सकें। जब हम लिखकर कोई भी चीज याद करेगे तो वो चीजे जल्दी याद होंगी। जब चीजे याद हो जाए तो उसका नोट्स भी बना लें। फिर चाहें तो उसका ऑडियो भी रिकॉर्ड कर सुन सकते हैं, यह भी आपको याद करने में सहायता करेगा।
प्रतिदिन आधार पर अध्ययन करें खुद से प्रश्न पूंछे – जो कुछ भी याद करे उसे प्रतिदिन आधार पर एक-एक पाठ के रूप में याद करना चाहिए। अगर एक दिन में सारी पुस्तक को ख़त्म करने बठेंगे तो कुछ भी याद नही होगा और जो कुछ भी याद रहेगा उसे भी भूलने का डर रहता है यानी पढ़ाई करने के नियम हमे अच्छे से फॉलो करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आपने जो पाठ उससे सम्बंधित कुछ प्रश्न मन में सोंचे और उसके उत्तर दें, यह प्रक्रिया आपके दिमाग को काफी तेज कर देता हैं और आपके उत्तर देने के कौशल को भी निखारता है।
रिविजन अवश्य करें – टाइम टेबल में पुनरावृत्ति के लिए पर्याप्त वक्त रखें, जिससे आखिरी समय में परेशानी न हो। जैसे ही कोचिंग समाप्त होती है अपने क्लास नोट्स की पुनरावृत्ति कर लें। अगर आप कोचिंग नहीं लेते तो कल के पढ़ें हुए अध्ययन को दोहरा लें और फिर नया अध्ययन करें। दोहराने की प्रक्रिया अगले दिन अध्ययन शुरू होने से पहले और फिर सप्ताह के अंत में और फिर महीने भर में जितना पढ़ा उसे दुहराने की होनी चाहिए। अलग-अलग तरीकों से पुनरावृत्ति करें ताकि आपको पढ़ने में भी मजा आए। इससे आप पढ़ी हुए सामग्री को भूलेंगे नहीं। कई बार दूसरों के साथ अध्ययन करने पर आप यह जान सकते हैं कि विषय को पूरी तरह से समझ पायें हैं या नहीं। यदि आपने प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं और उसे आप दूसरों को अच्छी तरह समझा पाने में सफल हो गए तो समझिए कि आपके द्वारा अध्ययन किये गए विषय को आपने आत्मसात कर लिया। वरना आप महसूस करेंगे कि अभी कुछ और मेहनत करना जरूरी है। तो दोस्तों हम जो कुछ भी याद करे उसे बार बार दोहराते जरुर रहे तो हम कभी भी उसे भूल नही सकते।
(फेसबुक ग्रुप मिशन यू पी एस सी के वाॅल से साभार)
Thursday, 18 January 2018
धर्म जड़ या गतिमान
धर्म जड़ नहीं है, गतिमान है। मैं ऐसा इसलिये कह रहा हूँ क्योंकि धर्म जीवन जीने का एक मार्ग है। चूंकि जीवन गतिमान है अतः धर्म भी गतिमान है। अर्थात समय के साथ धर्म की रीति-नीति, नियम-परम्परा में परिवर्तन होना ही चाहिए अन्यथा वह जीवन को जड़ बना देगा। जो सृष्टि के विनाश का एकमात्र कारण होगा। आजकल यही हो रहा है। हर तरफ कथित धार्मिक जड़ता का साम्राज्य है। कथित इसलिये कि वह धर्म नहीं है, धर्म का आवरण है। असली धर्म तो दिखता ही नहीं हमें। क्या धार्मिक परंपराओं के नाम पर हम जीवन को नष्ट होने दें? दीपावली पर पटाखा नहीं छूटा तो धर्म टूटा, नदी में दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी का विसर्जन नहीं हुआ तो धर्म टूटा, होली पर चेहरे पर मोबीआॅयल, कचरा और सिंथेटिक रंग पोतने पर पाबंदी लगी तो परंपरा का हनन हो गया, बकरीद पर बकरा नहीं कटा तो अल्लाह नाराज हो गया, तीन तलाक, हलाला, मुताह निकाह पर टिप्पणी हुई तो कयामत हो गया, किसी कथित निम्न वर्णीय व्यक्ति के हाथ का छुआ खाया तो धर्म भ्रष्ट हो गया। आखिर धर्म इतना क्षणभंगुर कैसे हो गया? वह तो नदी की तरह सतत गतिमान, नवोंमेषी और सागर की तरह विशाल और प्रशांत है। हम क्यों नहीं सोचते कि हम कथित धर्म के कारण जीवित नहीं हैं बल्कि धर्म हमसे है। अर्थात जीवन महत्वपूर्ण है धर्म नहीं। फिर धर्म की शर्त पर हम जीवन क्यों होम करते हैं?
धर्म भय का स्रोत नहीं अभय का मार्ग है। धर्म जीवन का हंता नहीं जीवन को सुंदर बनाने का तरीका है। लेकिन अज्ञानता के कारण, हम कट्टर हो रहे हैं। हम वास्तविक धर्म त्याग कर धर्म के विंबों को ग्रहण कर रहे हैं। जिस भंगुर धर्म का हम कट्टरता से वरण करते हैं वह सिर्फ तीन तथ्यों पर आधारित हो सकता है। एक- पंडित-पुजारियों, मौलवियों, पादरियों द्वारा खुद के अस्तित्व को बनाये रखने का उपक्रम, दो- आतंकवाद का जरिया (इसे सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद न समझें यह व्यापक शब्द है), तीन- सृष्टि का विनाश। क्या हम यही चाहते हैं?..........................
धर्म भय का स्रोत नहीं अभय का मार्ग है। धर्म जीवन का हंता नहीं जीवन को सुंदर बनाने का तरीका है। लेकिन अज्ञानता के कारण, हम कट्टर हो रहे हैं। हम वास्तविक धर्म त्याग कर धर्म के विंबों को ग्रहण कर रहे हैं। जिस भंगुर धर्म का हम कट्टरता से वरण करते हैं वह सिर्फ तीन तथ्यों पर आधारित हो सकता है। एक- पंडित-पुजारियों, मौलवियों, पादरियों द्वारा खुद के अस्तित्व को बनाये रखने का उपक्रम, दो- आतंकवाद का जरिया (इसे सिर्फ इस्लामिक आतंकवाद न समझें यह व्यापक शब्द है), तीन- सृष्टि का विनाश। क्या हम यही चाहते हैं?..........................
सहिष्णुता एवं प्रेम (आई. ए. एस. मुख्य परीक्षा 2017 जी. एस.-1)
प्रश्न-11, सहिष्णुता एवं प्रेम भावना न केवल अति प्राचीन समय से ही भारतीय समाज का एक रोचक अभिलक्षण रही है अपितु वर्तमान में भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सविस्तार स्पष्ट कीजिये। ( यू पी एस सी मुख्य परीक्षा 2017 जी. एस.-1)
उत्तर - अनेक विविधताओं के उपरांत भी भारत में एकता का विशिष्ट लक्षण विद्यमान है। इसके मूल में एक महत्त्वपूर्ण कारण सहिष्णुता एवं प्रेम है। भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'अतिथि देवो भव' का दर्शन है। जो यहाँ के जनमानस में गहरे तक रचा-बसा हुआ है। इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है- 'सियाराम सब जग जानी। करहूं प्रनाम जोरि जुग पानी।।' जैन धर्म के पंच महाव्रत का प्रथम व्रत 'अहिंसा' सहिष्णुता एवं प्रेम का ही एक रूप है।
महान सम्राट अशोक ने अपने सप्तम शिलालेख में सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता की भावना के प्रसार एवं सम्मान का निर्देश दिया। महान मुगल बादशाह अकबर ने इसी भावना के पोषण में सुलह-ए-कुल की नीति का अनुसरण किया तथा अपने दरबार में विविध धर्मों, सम्प्रदायों और मत-मतान्तर के लोगों को स्थान दिया था।
भारत में कई आक्रांता आये किंतु वे यहीं के होकर रह गये, इसी की मिट्टी में घुल मिल गये। कई विदेशी यात्रियों जैसे - मेगास्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग आदि ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इस तथ्य स्पष्ट वर्णन किया है। और सबसे बड़ी बात विश्व को सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देने वाला बौद्ध धर्म भी भारत की ही देन है।
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान बहुसंख्य भारतीयों ने जिसमें विभिन्न वर्ण, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय और जाति के लोग थे ने बढ़ चढ़ कर अपने प्राणों को उत्सर्ग किया और देश को परतंत्रता के बंधन से मुक्त कराया। स्वतंत्रता के महानायक गांधी जी का भी यह स्पष्ट मत था कि देश में सहिष्णुता और प्रेम का ही राज्य होना चाहिए। उनका प्रिय भजन- 'रघुपति राघव राजा राम' इसी का उद्घोष करता है।
वर्तमान समय में भी अनेकशः भारतीय समाज और सरकार ने इस विशिष्ट अभिलक्षण से विश्व को परिचित कराया है। चाहे वह तमाम शत्रुता के बावजूद पाकिस्तानी नागरिक के कैंसर के इलाज हेतु वीजा देने की बात हो, अरब महिला के मोटापा के इलाज का मुद्दा हो, तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को शरण देने या फिर बांग्लादेशी और म्यांमार के शरणार्थियों को आश्रय देने का मुद्दा हो।
इन समस्त सकारात्मकताओं के बावजूद कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो इस अभिलक्षण पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। जैसे- गौ रक्षा के नाम पर ऊना के दलित युवाओं के साथ मारपीट, कथित गौ-तस्कर अखलाक की हत्या, उत्तर प्रदेश में एंटी-रोमियो दल, कथित लव जेहाद, युवा बच्चों द्वारा अपने वृद्ध माता-पिता का तिरस्कार, साम्प्रदायिक दंगे, स्त्रियों - बच्चियों के साथ अभद्रता, बलात्कार और हत्या, जातिवादिता आदि ऐसे ही मामले हैं।
किंतु भारतीय जनमानस इतना प्रबुद्ध है कि वह इसका विरोध करता है। साथ ही भारतीय लोकतंत्र में संविधान, सरकार और न्यायपालिका इतनी सक्षम है कि वह इन समस्याओं से निपट सकती है।
उत्तर - अनेक विविधताओं के उपरांत भी भारत में एकता का विशिष्ट लक्षण विद्यमान है। इसके मूल में एक महत्त्वपूर्ण कारण सहिष्णुता एवं प्रेम है। भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'अतिथि देवो भव' का दर्शन है। जो यहाँ के जनमानस में गहरे तक रचा-बसा हुआ है। इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है- 'सियाराम सब जग जानी। करहूं प्रनाम जोरि जुग पानी।।' जैन धर्म के पंच महाव्रत का प्रथम व्रत 'अहिंसा' सहिष्णुता एवं प्रेम का ही एक रूप है।
महान सम्राट अशोक ने अपने सप्तम शिलालेख में सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता की भावना के प्रसार एवं सम्मान का निर्देश दिया। महान मुगल बादशाह अकबर ने इसी भावना के पोषण में सुलह-ए-कुल की नीति का अनुसरण किया तथा अपने दरबार में विविध धर्मों, सम्प्रदायों और मत-मतान्तर के लोगों को स्थान दिया था।
भारत में कई आक्रांता आये किंतु वे यहीं के होकर रह गये, इसी की मिट्टी में घुल मिल गये। कई विदेशी यात्रियों जैसे - मेगास्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग आदि ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इस तथ्य स्पष्ट वर्णन किया है। और सबसे बड़ी बात विश्व को सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देने वाला बौद्ध धर्म भी भारत की ही देन है।
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान बहुसंख्य भारतीयों ने जिसमें विभिन्न वर्ण, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय और जाति के लोग थे ने बढ़ चढ़ कर अपने प्राणों को उत्सर्ग किया और देश को परतंत्रता के बंधन से मुक्त कराया। स्वतंत्रता के महानायक गांधी जी का भी यह स्पष्ट मत था कि देश में सहिष्णुता और प्रेम का ही राज्य होना चाहिए। उनका प्रिय भजन- 'रघुपति राघव राजा राम' इसी का उद्घोष करता है।
वर्तमान समय में भी अनेकशः भारतीय समाज और सरकार ने इस विशिष्ट अभिलक्षण से विश्व को परिचित कराया है। चाहे वह तमाम शत्रुता के बावजूद पाकिस्तानी नागरिक के कैंसर के इलाज हेतु वीजा देने की बात हो, अरब महिला के मोटापा के इलाज का मुद्दा हो, तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को शरण देने या फिर बांग्लादेशी और म्यांमार के शरणार्थियों को आश्रय देने का मुद्दा हो।
इन समस्त सकारात्मकताओं के बावजूद कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो इस अभिलक्षण पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। जैसे- गौ रक्षा के नाम पर ऊना के दलित युवाओं के साथ मारपीट, कथित गौ-तस्कर अखलाक की हत्या, उत्तर प्रदेश में एंटी-रोमियो दल, कथित लव जेहाद, युवा बच्चों द्वारा अपने वृद्ध माता-पिता का तिरस्कार, साम्प्रदायिक दंगे, स्त्रियों - बच्चियों के साथ अभद्रता, बलात्कार और हत्या, जातिवादिता आदि ऐसे ही मामले हैं।
किंतु भारतीय जनमानस इतना प्रबुद्ध है कि वह इसका विरोध करता है। साथ ही भारतीय लोकतंत्र में संविधान, सरकार और न्यायपालिका इतनी सक्षम है कि वह इन समस्याओं से निपट सकती है।
Sunday, 14 January 2018
प्रकाश ही विकास है
निबंध का विषय - प्रकाश ही विकास है
(आई. ए. एस. मुख्य परीक्षा के लिये प्रथम बार निबंध लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। आप सब प्रिय मित्रों से निवेदन है कृपया निबंध पढ़कर सही मूल्यांकन करते हुए सार्थक सुझाव देने का कष्ट करें।)
सुरमयी संध्या के समय पक्षीगण कतारबद्ध होकर शांत भाव से अपने-अपने घोंसले में वापस आ रहे हैं। गायें धूलि उड़ाती हुई गोशालाओं में लौट रही हैं। लोग अपने-अपने काम को समाप्त कर घरों की ओर लौट रहे हैं। धीरे-धीरे पूरा वातावरण शांत और चारों ओर नीरवता ही नीरवता। वसुधा सो चुकी है। चल रहा है सिर्फ नियति नटी का कार्यकलाप। शांत और चुपचाप।
अरुणिम आभा के साथ सूर्य अपने उदयाचल पर विराजमान हो चुका है। कवि लिखते हैं -
"चाहता उछलूं विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह,
रात का राजा खड़ा है,
राह में बनकर भिखारी,
आ रही रवि की सवारी।"
अरे! रात का राजा भिखारी क्यों हो गया? रवि, प्रकाश का देवता विजयी क्यों हो गया? यही तो है "प्रकाश ही विकास है"। सारी जगती जाग चुकी है। पक्षीगण कलरव करते हुए भोजन की खोज में निकल चुके हैं। अधिकारी-कर्मचारीगण, मजदूर वर्ग अपने-अपने कार्यस्थल की ओर चले आ रहे हैं। बच्चे उछलते- कूदते विद्यालय की ओर जा रहे हैं। लग रहा है सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन का संचार हो गया है।
सचमुच प्रकाश ही विकास है। प्रकाश के साथ आर्थिक, बौद्धिक, ज्ञान, सामाजिक - सांस्कृतिक, राजनैतिक, प्राकृतिक, जैविक और भौतिक आदि सभी प्रकार के विकास जुड़े हुए हैं।
विश्व के अधिकांश आर्थिक क्रियाकलाप दिन में ही सम्पन्न होते हैं। लोग अपने कार्यस्थल पर दिन में ही कार्य करते हैं। विश्व सभ्यता के विकास की धुरी प्रकाश और ऊर्जा के विभिन्न स्रोत जैसे विद्युत, पेट्रोलियम, भू-तापीय ऊर्जा, जैव ईंधन आदि होकर ही गुजरती है। दिलचस्प है कि आदिम सभ्यता की प्रथम खोज प्रकाश और ऊर्जा के रूप में आग ही है।
एक तरह से ज्ञान को भी प्रकाश कहा गया है। श्री गुरुगीता में आता है -
"गुकारश्चान्धकारो हि, रुकारस्तेज उच्यते।
अज्ञानग्रासकं ब्रह्म, गुरुरेव न संशयः।।"
अर्थात् गुरु शब्द का 'गु' अंधकार तथा 'रु' प्रकाश का प्रतीक है। ब्रह्म रूपी गुरु ही इस अज्ञान को समाप्त करने वाले हैं।
जब गुरु के ज्ञान का प्रकाश मिलता है तब शिष्य का अज्ञान रूपी अंधकार समाप्त हो जाता है तथा उसका सर्वांगीण, आध्यात्मिक, मानसिक, बौद्धिक तथा भौतिक विकास होता है और वह उत्तरोत्तर विकसित ही होता जाता है। क्योंकि कहा गया है -
"गुकारः प्रथमो वर्णो मायादिगुणभासकः।
रुकारोऽस्ति परं ब्रह्म मायाभ्रान्तिविमोचनम्।।"
अर्थात् 'गु' यह प्रथम वर्ण माया, मोह, मद, मत्सर आदि का प्रतीक है जबकि 'रु' परब्रह्म रुपी है जो इन सबको हटाने वाला है।
गुरु, शिष्य की नचिकेताग्नि को उद्दीप्त कर तथा उसका सम्यक समाधान कर उसके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इससे उसके निजी कल्याण के साथ ही समाज, देश और सम्पूर्ण मानवजाति का विकास होता है। गुरु से ज्ञान प्राप्त कर ही नानक जी ने आत्म कल्याण के साथ मानवमात्र को आलोकित किया। इसी स्मृति में प्रकाश-पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बुद्ध, महावीर, मुहम्मद साहब, ईसा मसीह, कबीरदास, संत दादू, संत रविदास, मीराबाई आदि ने अपने ज्ञान के प्रकाश से संसार को आलोकित किया। जिससे लोग आज भी प्रकाश प्राप्त कर आत्म-विकास करते हैं।
प्रकाश-पर्व दीपावली भी इसी प्रकाश के साथ विकास का अद्भुत संयोजन है। धान की मड़ाई के बाद भारतीय किसान समाज धन-धान्य सम्पन्न होकर दीप जलाकर लक्ष्मी का स्वागत करता है। प्रकाश के साथ हर्षोल्लास और बंधुत्व का प्रसार होता है। व्यापारी बंधु इस पर्व की उत्सुकता पूर्वक प्रतीक्षा करते हैं और प्रचुर व्यापार कर विकास की ओर अग्रसर होते हैं।
राजनीति और राज्य भी "प्रकाश ही विकास" की संकल्पना से अछूता नहीं है। यद्यपि यहां इसका अर्थ बदल जाता है। यहां प्रकाश का अर्थ है - स्वतंत्रता, समानता, न्याय और लोक- कल्याणकारी राज्य की स्थापना। स्वाधीनता की पहली सुबह से पूर्व लाल किले की प्राचीर से अपने प्रथम और प्रसिद्ध उद्बोधन 'Trust with destiny' में पं. नेहरू जी ने कहा था-"आज रात बारह बजे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नयी सुबह के साथ उठेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत कम आता है, जब हम पुराने को छोड़ नये की तरफ जाते हैं, जब एक युग का अंत होता है और जब वर्षों से शोषित एक देश की आत्मा अपनी बात कह सकती है।"
पंडित नेहरू जी का उक्त उद्बोधन एक नयी सुबह के साथ भारतीय विकास की उड़ान को एक नयी उम्मीद, नया साहस देने के साथ देश के भविष्य का नया चित्र खींचता है।
अमेरिकी स्वतंत्रता क्रांति, फ्रांसीसी क्रांति, इंग्लैंड की रक्तहीन क्रांति, रूसी क्रांति आदि स्वतंत्रता रूपी प्रकाश की प्राप्ति की छटपटाहट से ही निकले हैं। जगजाहिर है कि आज ये देश विकास के शीर्ष पर विराजमान हैं। स्वतंत्रता की यह लौ न केवल राज्य के स्तर पर बल्कि आम आदमी, शोषित - पीड़ित, दलित और दमित वर्ग के लिये भी उतना ही आकर्षक और उपयोगी है। इन वर्गों ने भी स्वतंत्रता और समानता प्राप्त कर विकास की असीम ऊंचाइयों को छुआ है।
जीवों और वनस्पतियों का विकास भी प्रकाश के आलोक में सम्भव होता है। यद्यपि कई सारी जैविक क्रियाओं के लिये प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती तथापि जीवन के प्रमुख स्रोत भोजन को जीव और खास करके वनस्पति और पेड़ - पौधे प्रकाश की उपस्थिति में प्राप्त करते हैं।
भौतिक - सांसरिक जगत में विद्युत ऊर्जा की खोज, बल्व का आविष्कार, सौर्य ऊर्जा दोहन आदि के माध्यम से मनुष्य विकास की असीम ऊंचाइयों को छू रहा है। बिना इसके विकास की कल्पना करना भी दुष्कर है। इसीलिये विभिन्न राज्य अपने नागरिकों को ऊर्जा और प्रकाश सस्ते, सहज और सरल तरीके से उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील रहते हैं। इस संदर्भ में भारत सरकार की कई पहलें जैसे, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, सौर्य ऊर्जा मिशन, स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा मिशन आदि उल्लेखनीय हैं।
यद्यपि विकास की आपाधापी में मनुष्य इतना मग्न हो गया कि प्रकाश का वास्तविक उद्देश्य भूल गया। प्रकाश का उद्देश्य विकास करना है न कि विनाश। किंतु प्रकाश और ऊर्जा के प्रमुख स्रोत, प्राकृतिक संसाधनों का मनुष्य ने अविवेकपूर्ण और अंधाधुंध दोहन किया। फलतः अनेक पर्यावरणीय, आर्थिक और जीवन अस्तित्व की समस्याएं उत्पन्न हो गयीं। विद्युत निर्माण इकाइयों से पर्यावरण प्रदूषण, शहरीकरण और अति प्रकाश के उपयोग से प्रकाश प्रदूषण आदि कुछ ऐसी ही समस्याएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि प्रकाश को विकास का संधृत और संतुलित माध्यम बनाया जाये न कि विनाश का अस्त्र और समस्या की जड़।
"न कर इतना उजाला तू, कि आंखें चकमका जायें।
मगर हो रौशनी इतनी, कि दुनिया जगमगा जाये।
ये माना रौशनी जग में, इबारत लिख रही प्रतिपल।
इमारत है बड़ी ऊंची, कहीं ना चरमरा जाये।"
(आई. ए. एस. मुख्य परीक्षा के लिये प्रथम बार निबंध लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। आप सब प्रिय मित्रों से निवेदन है कृपया निबंध पढ़कर सही मूल्यांकन करते हुए सार्थक सुझाव देने का कष्ट करें।)
सुरमयी संध्या के समय पक्षीगण कतारबद्ध होकर शांत भाव से अपने-अपने घोंसले में वापस आ रहे हैं। गायें धूलि उड़ाती हुई गोशालाओं में लौट रही हैं। लोग अपने-अपने काम को समाप्त कर घरों की ओर लौट रहे हैं। धीरे-धीरे पूरा वातावरण शांत और चारों ओर नीरवता ही नीरवता। वसुधा सो चुकी है। चल रहा है सिर्फ नियति नटी का कार्यकलाप। शांत और चुपचाप।
अरुणिम आभा के साथ सूर्य अपने उदयाचल पर विराजमान हो चुका है। कवि लिखते हैं -
"चाहता उछलूं विजय कह,
पर ठिठकता देखकर यह,
रात का राजा खड़ा है,
राह में बनकर भिखारी,
आ रही रवि की सवारी।"
अरे! रात का राजा भिखारी क्यों हो गया? रवि, प्रकाश का देवता विजयी क्यों हो गया? यही तो है "प्रकाश ही विकास है"। सारी जगती जाग चुकी है। पक्षीगण कलरव करते हुए भोजन की खोज में निकल चुके हैं। अधिकारी-कर्मचारीगण, मजदूर वर्ग अपने-अपने कार्यस्थल की ओर चले आ रहे हैं। बच्चे उछलते- कूदते विद्यालय की ओर जा रहे हैं। लग रहा है सम्पूर्ण सृष्टि में जीवन का संचार हो गया है।
सचमुच प्रकाश ही विकास है। प्रकाश के साथ आर्थिक, बौद्धिक, ज्ञान, सामाजिक - सांस्कृतिक, राजनैतिक, प्राकृतिक, जैविक और भौतिक आदि सभी प्रकार के विकास जुड़े हुए हैं।
विश्व के अधिकांश आर्थिक क्रियाकलाप दिन में ही सम्पन्न होते हैं। लोग अपने कार्यस्थल पर दिन में ही कार्य करते हैं। विश्व सभ्यता के विकास की धुरी प्रकाश और ऊर्जा के विभिन्न स्रोत जैसे विद्युत, पेट्रोलियम, भू-तापीय ऊर्जा, जैव ईंधन आदि होकर ही गुजरती है। दिलचस्प है कि आदिम सभ्यता की प्रथम खोज प्रकाश और ऊर्जा के रूप में आग ही है।
एक तरह से ज्ञान को भी प्रकाश कहा गया है। श्री गुरुगीता में आता है -
"गुकारश्चान्धकारो हि, रुकारस्तेज उच्यते।
अज्ञानग्रासकं ब्रह्म, गुरुरेव न संशयः।।"
अर्थात् गुरु शब्द का 'गु' अंधकार तथा 'रु' प्रकाश का प्रतीक है। ब्रह्म रूपी गुरु ही इस अज्ञान को समाप्त करने वाले हैं।
जब गुरु के ज्ञान का प्रकाश मिलता है तब शिष्य का अज्ञान रूपी अंधकार समाप्त हो जाता है तथा उसका सर्वांगीण, आध्यात्मिक, मानसिक, बौद्धिक तथा भौतिक विकास होता है और वह उत्तरोत्तर विकसित ही होता जाता है। क्योंकि कहा गया है -
"गुकारः प्रथमो वर्णो मायादिगुणभासकः।
रुकारोऽस्ति परं ब्रह्म मायाभ्रान्तिविमोचनम्।।"
अर्थात् 'गु' यह प्रथम वर्ण माया, मोह, मद, मत्सर आदि का प्रतीक है जबकि 'रु' परब्रह्म रुपी है जो इन सबको हटाने वाला है।
गुरु, शिष्य की नचिकेताग्नि को उद्दीप्त कर तथा उसका सम्यक समाधान कर उसके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इससे उसके निजी कल्याण के साथ ही समाज, देश और सम्पूर्ण मानवजाति का विकास होता है। गुरु से ज्ञान प्राप्त कर ही नानक जी ने आत्म कल्याण के साथ मानवमात्र को आलोकित किया। इसी स्मृति में प्रकाश-पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। बुद्ध, महावीर, मुहम्मद साहब, ईसा मसीह, कबीरदास, संत दादू, संत रविदास, मीराबाई आदि ने अपने ज्ञान के प्रकाश से संसार को आलोकित किया। जिससे लोग आज भी प्रकाश प्राप्त कर आत्म-विकास करते हैं।
प्रकाश-पर्व दीपावली भी इसी प्रकाश के साथ विकास का अद्भुत संयोजन है। धान की मड़ाई के बाद भारतीय किसान समाज धन-धान्य सम्पन्न होकर दीप जलाकर लक्ष्मी का स्वागत करता है। प्रकाश के साथ हर्षोल्लास और बंधुत्व का प्रसार होता है। व्यापारी बंधु इस पर्व की उत्सुकता पूर्वक प्रतीक्षा करते हैं और प्रचुर व्यापार कर विकास की ओर अग्रसर होते हैं।
राजनीति और राज्य भी "प्रकाश ही विकास" की संकल्पना से अछूता नहीं है। यद्यपि यहां इसका अर्थ बदल जाता है। यहां प्रकाश का अर्थ है - स्वतंत्रता, समानता, न्याय और लोक- कल्याणकारी राज्य की स्थापना। स्वाधीनता की पहली सुबह से पूर्व लाल किले की प्राचीर से अपने प्रथम और प्रसिद्ध उद्बोधन 'Trust with destiny' में पं. नेहरू जी ने कहा था-"आज रात बारह बजे, जब सारी दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता की नयी सुबह के साथ उठेगा। एक ऐसा क्षण जो इतिहास में बहुत कम आता है, जब हम पुराने को छोड़ नये की तरफ जाते हैं, जब एक युग का अंत होता है और जब वर्षों से शोषित एक देश की आत्मा अपनी बात कह सकती है।"
पंडित नेहरू जी का उक्त उद्बोधन एक नयी सुबह के साथ भारतीय विकास की उड़ान को एक नयी उम्मीद, नया साहस देने के साथ देश के भविष्य का नया चित्र खींचता है।
अमेरिकी स्वतंत्रता क्रांति, फ्रांसीसी क्रांति, इंग्लैंड की रक्तहीन क्रांति, रूसी क्रांति आदि स्वतंत्रता रूपी प्रकाश की प्राप्ति की छटपटाहट से ही निकले हैं। जगजाहिर है कि आज ये देश विकास के शीर्ष पर विराजमान हैं। स्वतंत्रता की यह लौ न केवल राज्य के स्तर पर बल्कि आम आदमी, शोषित - पीड़ित, दलित और दमित वर्ग के लिये भी उतना ही आकर्षक और उपयोगी है। इन वर्गों ने भी स्वतंत्रता और समानता प्राप्त कर विकास की असीम ऊंचाइयों को छुआ है।
जीवों और वनस्पतियों का विकास भी प्रकाश के आलोक में सम्भव होता है। यद्यपि कई सारी जैविक क्रियाओं के लिये प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती तथापि जीवन के प्रमुख स्रोत भोजन को जीव और खास करके वनस्पति और पेड़ - पौधे प्रकाश की उपस्थिति में प्राप्त करते हैं।
भौतिक - सांसरिक जगत में विद्युत ऊर्जा की खोज, बल्व का आविष्कार, सौर्य ऊर्जा दोहन आदि के माध्यम से मनुष्य विकास की असीम ऊंचाइयों को छू रहा है। बिना इसके विकास की कल्पना करना भी दुष्कर है। इसीलिये विभिन्न राज्य अपने नागरिकों को ऊर्जा और प्रकाश सस्ते, सहज और सरल तरीके से उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील रहते हैं। इस संदर्भ में भारत सरकार की कई पहलें जैसे, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, सौर्य ऊर्जा मिशन, स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा मिशन आदि उल्लेखनीय हैं।
यद्यपि विकास की आपाधापी में मनुष्य इतना मग्न हो गया कि प्रकाश का वास्तविक उद्देश्य भूल गया। प्रकाश का उद्देश्य विकास करना है न कि विनाश। किंतु प्रकाश और ऊर्जा के प्रमुख स्रोत, प्राकृतिक संसाधनों का मनुष्य ने अविवेकपूर्ण और अंधाधुंध दोहन किया। फलतः अनेक पर्यावरणीय, आर्थिक और जीवन अस्तित्व की समस्याएं उत्पन्न हो गयीं। विद्युत निर्माण इकाइयों से पर्यावरण प्रदूषण, शहरीकरण और अति प्रकाश के उपयोग से प्रकाश प्रदूषण आदि कुछ ऐसी ही समस्याएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि प्रकाश को विकास का संधृत और संतुलित माध्यम बनाया जाये न कि विनाश का अस्त्र और समस्या की जड़।
"न कर इतना उजाला तू, कि आंखें चकमका जायें।
मगर हो रौशनी इतनी, कि दुनिया जगमगा जाये।
ये माना रौशनी जग में, इबारत लिख रही प्रतिपल।
इमारत है बड़ी ऊंची, कहीं ना चरमरा जाये।"
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