प्रश्न-11, सहिष्णुता एवं प्रेम भावना न केवल अति प्राचीन समय से ही भारतीय समाज का एक रोचक अभिलक्षण रही है अपितु वर्तमान में भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सविस्तार स्पष्ट कीजिये। ( यू पी एस सी मुख्य परीक्षा 2017 जी. एस.-1)
उत्तर - अनेक विविधताओं के उपरांत भी भारत में एकता का विशिष्ट लक्षण विद्यमान है। इसके मूल में एक महत्त्वपूर्ण कारण सहिष्णुता एवं प्रेम है। भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'अतिथि देवो भव' का दर्शन है। जो यहाँ के जनमानस में गहरे तक रचा-बसा हुआ है। इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है- 'सियाराम सब जग जानी। करहूं प्रनाम जोरि जुग पानी।।' जैन धर्म के पंच महाव्रत का प्रथम व्रत 'अहिंसा' सहिष्णुता एवं प्रेम का ही एक रूप है।
महान सम्राट अशोक ने अपने सप्तम शिलालेख में सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता की भावना के प्रसार एवं सम्मान का निर्देश दिया। महान मुगल बादशाह अकबर ने इसी भावना के पोषण में सुलह-ए-कुल की नीति का अनुसरण किया तथा अपने दरबार में विविध धर्मों, सम्प्रदायों और मत-मतान्तर के लोगों को स्थान दिया था।
भारत में कई आक्रांता आये किंतु वे यहीं के होकर रह गये, इसी की मिट्टी में घुल मिल गये। कई विदेशी यात्रियों जैसे - मेगास्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग आदि ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इस तथ्य स्पष्ट वर्णन किया है। और सबसे बड़ी बात विश्व को सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देने वाला बौद्ध धर्म भी भारत की ही देन है।
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान बहुसंख्य भारतीयों ने जिसमें विभिन्न वर्ण, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय और जाति के लोग थे ने बढ़ चढ़ कर अपने प्राणों को उत्सर्ग किया और देश को परतंत्रता के बंधन से मुक्त कराया। स्वतंत्रता के महानायक गांधी जी का भी यह स्पष्ट मत था कि देश में सहिष्णुता और प्रेम का ही राज्य होना चाहिए। उनका प्रिय भजन- 'रघुपति राघव राजा राम' इसी का उद्घोष करता है।
वर्तमान समय में भी अनेकशः भारतीय समाज और सरकार ने इस विशिष्ट अभिलक्षण से विश्व को परिचित कराया है। चाहे वह तमाम शत्रुता के बावजूद पाकिस्तानी नागरिक के कैंसर के इलाज हेतु वीजा देने की बात हो, अरब महिला के मोटापा के इलाज का मुद्दा हो, तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को शरण देने या फिर बांग्लादेशी और म्यांमार के शरणार्थियों को आश्रय देने का मुद्दा हो।
इन समस्त सकारात्मकताओं के बावजूद कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो इस अभिलक्षण पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। जैसे- गौ रक्षा के नाम पर ऊना के दलित युवाओं के साथ मारपीट, कथित गौ-तस्कर अखलाक की हत्या, उत्तर प्रदेश में एंटी-रोमियो दल, कथित लव जेहाद, युवा बच्चों द्वारा अपने वृद्ध माता-पिता का तिरस्कार, साम्प्रदायिक दंगे, स्त्रियों - बच्चियों के साथ अभद्रता, बलात्कार और हत्या, जातिवादिता आदि ऐसे ही मामले हैं।
किंतु भारतीय जनमानस इतना प्रबुद्ध है कि वह इसका विरोध करता है। साथ ही भारतीय लोकतंत्र में संविधान, सरकार और न्यायपालिका इतनी सक्षम है कि वह इन समस्याओं से निपट सकती है।
उत्तर - अनेक विविधताओं के उपरांत भी भारत में एकता का विशिष्ट लक्षण विद्यमान है। इसके मूल में एक महत्त्वपूर्ण कारण सहिष्णुता एवं प्रेम है। भारतीय दर्शन 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'अतिथि देवो भव' का दर्शन है। जो यहाँ के जनमानस में गहरे तक रचा-बसा हुआ है। इसी कारण गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है- 'सियाराम सब जग जानी। करहूं प्रनाम जोरि जुग पानी।।' जैन धर्म के पंच महाव्रत का प्रथम व्रत 'अहिंसा' सहिष्णुता एवं प्रेम का ही एक रूप है।
महान सम्राट अशोक ने अपने सप्तम शिलालेख में सभी सम्प्रदायों में सहिष्णुता की भावना के प्रसार एवं सम्मान का निर्देश दिया। महान मुगल बादशाह अकबर ने इसी भावना के पोषण में सुलह-ए-कुल की नीति का अनुसरण किया तथा अपने दरबार में विविध धर्मों, सम्प्रदायों और मत-मतान्तर के लोगों को स्थान दिया था।
भारत में कई आक्रांता आये किंतु वे यहीं के होकर रह गये, इसी की मिट्टी में घुल मिल गये। कई विदेशी यात्रियों जैसे - मेगास्थनीज, फाह्यान, ह्वेनसांग आदि ने अपने यात्रा वृत्तांतों में इस तथ्य स्पष्ट वर्णन किया है। और सबसे बड़ी बात विश्व को सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देने वाला बौद्ध धर्म भी भारत की ही देन है।
स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान बहुसंख्य भारतीयों ने जिसमें विभिन्न वर्ण, वर्ग, धर्म, सम्प्रदाय और जाति के लोग थे ने बढ़ चढ़ कर अपने प्राणों को उत्सर्ग किया और देश को परतंत्रता के बंधन से मुक्त कराया। स्वतंत्रता के महानायक गांधी जी का भी यह स्पष्ट मत था कि देश में सहिष्णुता और प्रेम का ही राज्य होना चाहिए। उनका प्रिय भजन- 'रघुपति राघव राजा राम' इसी का उद्घोष करता है।
वर्तमान समय में भी अनेकशः भारतीय समाज और सरकार ने इस विशिष्ट अभिलक्षण से विश्व को परिचित कराया है। चाहे वह तमाम शत्रुता के बावजूद पाकिस्तानी नागरिक के कैंसर के इलाज हेतु वीजा देने की बात हो, अरब महिला के मोटापा के इलाज का मुद्दा हो, तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा और बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को शरण देने या फिर बांग्लादेशी और म्यांमार के शरणार्थियों को आश्रय देने का मुद्दा हो।
इन समस्त सकारात्मकताओं के बावजूद कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं घट जाती हैं जो इस अभिलक्षण पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं। जैसे- गौ रक्षा के नाम पर ऊना के दलित युवाओं के साथ मारपीट, कथित गौ-तस्कर अखलाक की हत्या, उत्तर प्रदेश में एंटी-रोमियो दल, कथित लव जेहाद, युवा बच्चों द्वारा अपने वृद्ध माता-पिता का तिरस्कार, साम्प्रदायिक दंगे, स्त्रियों - बच्चियों के साथ अभद्रता, बलात्कार और हत्या, जातिवादिता आदि ऐसे ही मामले हैं।
किंतु भारतीय जनमानस इतना प्रबुद्ध है कि वह इसका विरोध करता है। साथ ही भारतीय लोकतंत्र में संविधान, सरकार और न्यायपालिका इतनी सक्षम है कि वह इन समस्याओं से निपट सकती है।
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