*जिंदगी और सुकून की तलाश*
जो जिंदगी नहीं है जब तक उसे जिंदगी समझा जायेगा तक सुकून की तलाश बेईमानी है। जो जैसा है उसे वैसा स्वीकार कर लेने में ही सुकून है।
यद्यपि यह जीवन ही बेईमानी है। कितना भी कर लो, कुछ भी बन जाओ, कुछ भी पा जाओ, कुछ भी खा पी घूम लो मौज मस्ती कर लो लेकिन हाथ कुछ नहीं आने वाला है। जब तक हम बाहर सुकून की तलाश करेंगे तब तक सुकून आयेगा और चला जायेगा। क्षणिक होगा वह।
कभी आपने गौर किया है कि जब भी कुछ हम पाते हैं, खाते हैं, बनते हैं तब हमें एक सुख की अनुभूति होती है। जैसे - हमने एक नयी कार ले ली। बहुत सुख मिल रहा है। सीना चौड़ा करके चल रहे हैं। पड़ोसियों और दोस्तों को दिखा रहे हैं। लोगों की नजरों को भांप रहे हैं। इससे आपके अभिमान की तुष्टि हो जाती है। आप प्रसन्न हो जाते हैं। धीरे-धीरे लोगों की रुझान आपकी उपलब्धि में कम होने लगती है। लोग तारीफ करना बंद कर देते हैं। फिर धीरे-धीरे आपकी खुशी जाने लगती है। आप किसी अन्य चीज में खुशी तलाशने में जुट जाते हैं।
दरअसल आपको लगता है कि खुशी वस्तुओं, व्यक्तियों, पदों आदि में है लेकिन नहीं, वह आपके भीतर है, जिससे आप अंजान हैं। जब कोई इच्छित वस्तु, पद, प्रतिष्ठा, प्रेम, धन आदि मिल जाता है तब वह आपके भीतर से बाहर आ जाता है बिल्कुल एक बच्चे की तरह। लेकिन बच्चे की खुशी और आपकी खुशी में अंतर है। बच्चे की खुशी जिज्ञासा भाव के कारण है। वह तुच्छ कंकड़ से भी उतना ही खुश हो जाता जितना कि आप हीरे के कंकड़ को पाकर भी नहीं होते। लेकिन आपकी खुशी अभिमान जनित है। कल्पना कीजिये कि आपने करोड़ों रूपये वाली हीरे की अंगूठी पहनी और किसी ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया। आप दुखी हो जायेगें। वह हीरे की अंगूठी आपको सुख नहीं दे पायेगी। आपका अहंकार संतुष्ट नहीं हुआ।
कुल जमा मतलब यह है कि अहंकार जनित लालसा, अभिलाषा, तृष्णा ही आपके दुख का कारण है। अहंकार इसलिये कि आप मूलतः कुछ भी नहीं है लेकिन आप कुछ होना चाहते हैं। आप हैं तो सिर्फ वीर्य की एक बूंद की उपज यानी शून्य। लेकिन कुछ होने की छटपटाहट ही अशांति का कारण है। शांति चाहिए तो "कुछ होना" नहीं है, "बस होना है" just being.
सुकून तलाशना है तो धारा के विपरीत मत बहो धारा के साथ बहो और छोड़ खुद को धारा के साथ। संभव है इस स्थिति में हम कहीं पहुंचे नहीं। हम वैसे भी कहीं पहुंचते नहीं। लेकिन इससे व्यर्थ तैरने का श्रम न करना पड़ेगा। जीवन भी ऐसा ही है। नियति के हाथों बहो। नियति के साथ बहो। तैरो मत। जीवन जीने का मजा और सुकून दोनों मिल जायेगा। दरअसल ये दोनों सहोदर ही हैं। यही जीवन में शांति का एक मार्ग है।
विनय नमन🙏😊