Monday, 22 March 2021

अंतः अस्ति प्रारम्भः

 तुम न तो पूरा जीते हो और न ही पूरा मरते हो। तुम आधे अधूरे ढंग से जीते हो, मरते भी आधा अधूरा ही हो। जीवन पर तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है लेकिन मरने पर है। अंतः अस्ति प्रारम्भः। अंत ही आरम्भ है। अगर तुम सोते समय होश से सोओगे तो नींद ध्यान बन जायेगी और फिर तुम्हारा पूरा दिन ध्यानमय रहेगा। तुम मस्त रहोगे। इसी तरह अगर मरते समय होश से भर जाओ तो जीवन लेते समय तुम होश में ही रहोगे। फिर तुम्हारा पूरा जीवन परमात्मा के आनन्द में बीतेगा। तुम्हें उसे ढूंढने के लिए कंकड़ पत्थर के मकानों में नहीं जाना पड़ेगा। तुम स्वयं परमात्मा ही हो जाओगे। बल्कि हो ही। बस अंजान अपने परमात्मापन से। @विनय नमन 🙏🧘‍♂️

No comments:

Post a Comment