Tuesday, 9 March 2021

असली त्याग



अगर तुम निर्धन हो और फिर तुम्हारे मन में धन के प्रति वितृष्णा का भाव जगे, अगर तुम शक्तिहीन हो और तब तुम्हारे मन में अहिंसा का भाव जगे, अगर तुम असफल हो और तब तुम्हारा पद-प्रतिष्ठा से मोह भंग हो, अगर तुम घर-परिवार-पत्नी-संतान से हीन हो और तब तुम्हारे मन में संसार की निस्सारता का भाव जगे, अगर तुम बेईमानी करने में असमर्थ हो फिर तुम ईमानदारी प्रदर्शित करो तब समझ लेना तुम बहुत बड़े, मक्कार, झूठे और फरेबी हो। सब कुछ पाने के बाद अगर तुम्हारे भीतर कुछ पाने की चाह न बचे, सब कुछ कर चुकने के बाद तुम ऊब जाओ, सब कुछ भोग लेने के बाद उस सबकी निस्सारता का भाव जगे तो ही समझना की तुम सच्चे वैरागी हुए। अन्यथा घर छोड़ने के बाद आश्रम बना लोगे, परिवार छोड़ने के बाद चेला-चपाटी बना लोगे, धन छोड़ने के बाद आश्रमों का साम्राज्य खड़ा कर लोगे, पद-प्रतिष्ठा छोड़ने के बाद लोगों से पैर छुआकर, पदवंदना करवा लोगे, वैराग्य धारण करने के बाद भी, प्रथम द्रष्टया सब कुछ छोड़ने के बाद भी कुछ नहीं छूटेगा। न तो कुछ छोड़ो न ही कुछ पकड़ो। बस द्रष्टा बनो, साक्षी बनो।

©विनय नमन🙏🧘‍♂️🧘‍♂️🧘‍♂️

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