चीन का आर्थिक बहिष्कार
क्यों? ( लाभ के अंतर्गत भी लगभग यही बिंदु शामिल किये जा सकते हैं)
1- सीमा पर सामरिक तनाव का आर्थिक जवाब
2- मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना
3- पूंजी निकास को रोकना
4- व्यापार घाटे को कम करना
5- घरेलू उद्योगों को संरक्षित करना
6- चीन की आक्रामक विदेश नीति का जवाब
लाभ-
1- आयात में खर्च होने वाले विदेशी मुद्रा भंडार की बचत
2- घरेलू उद्योगों के संरक्षण से रोजगार में वृद्धि
3- घटिया चीनी सामानों का आयात बंद करने से उपभोक्ता हितों का संरक्षण
4- भविष्य में स्वावलंबन
5- देश का तीव्र आर्थिक विकास
हानि-
1- भारत - चीन संबंधों में दूरगामी तनाव और विकट दुष्परिणाम संभावित
2- चीन की आक्रामकता और पाकिस्तानी पृष्ठ पोषण में वृद्धि
3- चीन समर्थक पड़ोसी देशों (नेपाल, श्रीलंका आदि) से भी तनाव संभावित
चुनौतियाँ-
1- चीन के साथ भारत का आयात 70 अरब डाॅलर का है और जबकि निर्यात 17 अरब डॉलर। लेकिन चीन के समग्र वैदेशिक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी महज 3% है। संभव है कि चीन के ऊपर इस बहिष्कार का अधिक असर न पड़े।
2- भारत में चीन आयातित सामानों की अत्यधिक भागीदारी है। जैसे- खिलौना 90%, एल ई डी बल्व और एल सी डी 40%, दवाओं के लिये कच्चा माल (API) 80%, मोटर पार्ट 50%, मोबाइल पार्ट 70% आदि। ऐसे भी तत्काल बहिष्कार भारतीय उद्योगों को चौपट कर सकता है।
3- अनेक स्टार्टअप कंपनियों में चीनी कंपनियों ने निवेश किया है। जैसे - स्वीगी, जौमैटो, फ्लिपकालर्ट, बाय्जू आदि। यदि चीनी वस्तुओं और निवेश का बहिष्कार किया गया तो इन स्टार्टअपस् से भी निवेश निकाल लिया जायेगा। इससे ये कंपनियां पूंजी संकट से घिर सकती है।
समाधान-
1- आवश्यक वस्तुओं की सूची बनाकर मित्र देशों जैसे- जापान, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, यूरोपीय देशों आदि से सामान मंगाना
2- घरेलू विनिर्माण उद्योगों को सस्ता ऋण, कर छूट आदि देकर उत्पादन हेतु प्रोत्साहित करना
3- घरेलू श्रम का कुशलता पूर्वक उपयोग (विशेष कौशल प्रशिक्षित श्रमिकों को नियोजित करना, अर्ध्दकुशल और अकुशल श्रमिकों को प्रशिक्षित कर नियोजित करना)
4- घरेलू और विदेशी (चीन को छोड़कर) निवेश को प्रोत्साहित करना
5- भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंजूरी को आसान बनाना
6- सस्ती बिजली और कोयला उपलब्ध करवाना
7- सरकारी स्तर पर चीनी कंपनियों को ठेका देने से बचना
©विन्ध्येश्वरी
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