Friday, 26 June 2020

मौत का तोहफ़ा

मौत का तोहफ़ा*

तीन भाई थे।वे एक रास्ते से यात्रा कर रहे थे। उस रास्ते में एक नदी थी, जो बहुत ही भयावह और खतरनाक थी। उसे पार करने के चक्कर में सैकड़ों लोगों ने अपने प्राण गंवा चुके थे। इन भाइयों ने उस नदी पर जादू से एक पुल का निर्माण किया और आगे बढ़ने लगे। बीच पुल पर उनकी भेंट मृत्यु से हुई। मृत्यु उनके इस उद्यम और बुद्धिमानी से प्रसन्न थी। उसने पहले भाई से कहा - "तुम मुझसे वरदान में कोई एक चीज मांग सकते हो।" पहला भाई शक्तिशाली था। लेकिन उसे लगता था कि उसे अभी और शक्तिशाली होना चाहिए ताकि इस दुनिया में उसके मुकाबले कोई और न रहे, और वह अपने पुराने दुश्मन से बदला ले सके, उसे मृत्यु छू न सके। उसने मौत से कहा- "मुझे एक ऐसी चीज चाहिए जिससे मैं दुनिया में सबसे अधिक शक्तिशाली हो जाऊं। कोई मुझसे जीत न सके।" मृत्यु ने उसे एक शक्तिशाली जादुई "एल्डर छड़ी" दिया। वह आगे बढ़ गया। मृत्यु ने दूसरे भाई से भी कुछ मांगने के लिये कहा। दूसरा भाई अभिमानी था। वह मृत्यु को नीचा दिखाना चाहता था। उसने कहा -"मुझे कुछ ऐसा दीजिये जिससे मैं किसी को भी जीवित कर सकूं।" मृत्यु ने उसे एक पत्थर दिया, जिससे किसी को भी जीवित कर सकता था, कुछ भी पा सकता था। तीसरा भाई विनम्र और बुद्धिमान था। उसे मृत्यु के ऊपर भरोसा नहीं था। उसने कहा - "मुझे कोई ऐसी चीज दीजिये जिससे मैं दूसरे की नजर से छुप सकूं।" मृत्यु को न चाहते हुए भी अपना "अदृश्य चोंगा" देना पड़ा। तीनों भाई कुछ देर बाद अलग-अलग रास्ते पर चल पड़े।

पहला भाई एक गांव में गया जहाँ उसका पुराना दुश्मन जादूगर रहता था। उसने अपनी एल्डर छड़ी से उसे मार कर अपना पुराना बदला चुकता कर लिया। वह एक सराय में रुक गया। उसने दारू पिया, खाना खाया और सो गया। रात में एक चोर ने उसका गला घोंटकर मार दिया और वह एल्डर छड़ी चुरा ले गया। इस प्रकार मौत ने पहले भाई को अपने आगोश में ले लिया।

दूसरा भाई घर जाकर रहने लगा। उसने अपनी मरी हुई बहन को जिंदा कर दिया। लेकिन वह इस दुनिया में दुबारा आकर खुश नहीं थी। एक दिन वह फिर मर गयी। भाई ने उसे दुबारा जिंदा कर दिया। लेकिन इस बार वह पहले से भी ज्यादा दुखी थी। वह फिर उसे छोड़कर चली गयी। इससे दूसरा भाई बहुत दुखी हुआ। वह चिंता और तनाव में रहने लगा। एक दिन उसने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। इस प्रकार मौत ने दूसरे भाई को भी मार दिया।

तीसरा भाई एक सूनसान जगह पर घर बनाकर रहने लगा। उसने शादी की बच्चे पैदा किये। और जब मौत उसके पास आती तो वह "अदृश्य चोंगा" पहनकर गायब हो जाता। मौत हर बार उसे मारने में नाकाम हो जाती। जब एक दिन तीसरे भाई को लगा कि अब वह पर्याप्त जीवन जी चुका है, उसने वह चोंगा उतार कर अपने बेटे को दे दिया और खुद ब खुद मृत्यु के पास चला गया।

कहानी का निष्कर्ष यह है कि हम सब भी अपनी इच्छा, वासना, अहंकार और शक्ति के गुलाम हैं। हम निरंतर इन्हें पाने का यत्न करते रहते हैं। हमें लगता है कि धन, शक्ति, पद, प्रतिष्ठा, परिवार, पत्नी, पुत्र, पति, माता-पिता आदि हमें सुख देंगे। हम इनके दम पर मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेंगे। हम मृत्यु को चकमा दे लेंगे। लेकिन अंततः मृत्यु हमें किसी न किसी प्रकार से ग्रस ही लेता है। इनमें से कोई या इन जैसा कोई और, हमें मृत्यु से नहीं बचा सकता। सच तो यह है कि ये सब "हमें मृत्यु के द्वारा दिये गये तोहफे ही हैं।" हम इन्हीं के वशीभूत होकर एक दिन मृत्यु के आगोश में चले जाते हैं। छड़ी बल का प्रतीक है। इससे अहंकार उत्पन्न होता है। पत्थर वासना, इच्छा का प्रतीक है। इससे लालच, तनाव और चिंता आदि का जन्म होता है। अदृश्य चोंगा बुद्धि, विनम्रता, धर्म, कर्म, ईश्वर की आंड़ में छुपना है। इनमें से कोई भी उपकरण हमें मृत्यु से बचा नहीं सकता।


©विन्ध्येश्वरी
*यार्कशायर (इंग्लैंड) में 15वीं शताब्दी में लिखित एक परी  कथा का हिंदी अनुवाद
मूल लेखक - बेडले द बार्ड

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