गिनीज़ बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के अनुसार भारत में केरल राज्य के थिरुवनंतपुरम में संसार में महिलाओं द्वारा आयोजित सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान होता है। जिसमे लाखों महिलाई जाति, धर्म, ऊँच नीच के भेदभाव को भुलाकर दूर दूर से चलकर थिरुवनंतपुरम के प्राचीन आट्टूकल भगवति (देवी) मंदिर के प्रांगण में बिना किसी बुलावे या निमंत्रण के एकत्रित होती हैं।
यहाँ इस मंदिर में प्रति वर्ष फरवरी मार्च के महीने में दस दिनों का उत्सव होता है। उत्सव भरणी /कृत्तिका नक्षत्र के दिन प्रारंभ होता है। नौवां दिन विशेष महत्त्व का रहता है जब सभी महिलाएं देवी के लिए नैवेद्य के रूप में वहीं चूल्हे जलाकर खीर पकाती हैं। इसलिए इस ख़ास अनुष्ठान का नाम है “पोंगाला” है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है उफनने तक उबालना। इस तरह के पोंगाला का प्रचलन तमिलनाडु में भी कई जगह है परन्तु जो बात आट्टूकल में है वह अन्यत्र नहीं।
पिछली बार यह संख्या 15 लाख थी। जहाँ देखो वहां चूल्हा, सड़क के दोनों ओर, स्थानीय निवासियों के घरों के कम्पाउंड, दफ्तरों के बाहर या कहें जहाँ जगह मिली वहीं। मंदिर के लगभग 5 किमी की परिधि में यत्र तत्र सर्वत्र परन्तु कतारबद्ध।
यह त्यौहार केवल महिलाओं के लिए है और पुरुष इसमें भाग नहीं ले सकते। मूलतः यह एक आदिम (अवैदिक) परंपरा रही है और समाज के निम्न वर्ग ही इसमें भाग लिया करते थे। परन्तु अब स्थितियां बदल गयी हैं। अब तो सभी वर्ण के लोग और बड़ी - बड़ी हस्तियां भी यहाँ देखी जा सकती हैं। इसलिए इस पोंगाला को महिलाओं की शबरीमला कहा जाता है।
@साभार अंतर्जाल
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