मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
1- सर्वप्रथम विशाल साम्राज्य (उत्तर-पश्चिम में फारस से लेकर पूर्व में बंगाल तथा उत्तर में कश्मीर और नेपाल से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक) का विभाजन चार प्रांतों में
• उत्तरापथ - राजधानी तक्षशिला
• दक्षिणापथ - राजधानी सुवर्णगिरि
• अवंति (पश्चिमी) - राजधानी उज्जयिनी
• प्राची (मध्य और पुर्वी समुद्र तटीय प्रदेश) - राजधानी पाटलिपुत्र
(यह व्यवस्था वर्तमान मारत में कमोबेश क्षेत्रीय परिषदों की तरह है। उत्तरी, मध्य - पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी तथा पूर्वोत्तर परिषद)
2- मौर्यकालीन प्रशासन का स्तरीकरण और वर्तमान स्थिति
• केंद्र (मौर्य शासन) - वर्तमान भारत सरकार
• प्रांत (राजकुमार या आर्यपुत्र) - वर्तमान में राज्य
• मंडल (प्रदेष्टा या प्रादेशिक) - मंडल
• आहार या विषय (विषयपति) - जिला
• स्थानीय (800 ग्रामों का समूह - स्थानिक) - तहसील
• द्रोणमुख (400 ग्रामों का समूह) - विकासखंड या क्षेत्रपंचायत
• खार्वटिक (200 ग्रामों का समूह) - न्याय पंचायत
• संग्रहण (10 ग्रामों का समूह) - ग्राम पंचायत
• ग्राम (प्रशासन की सबसे छोटी इकाई - ग्रामणी) - राजस्व ग्राम
• ग्राम सभा से राजस्व संग्रहण में सहायता हेतु एक अधिकारी - गोप - वर्तमान में ग्राम पंचायत अधिकारी
@विन्ध्येश्वरी
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