Tuesday, 21 July 2020

गुप्तकालीन वर्णव्यवस्था

गुप्तकालीन वर्णव्यवस्था
1- चार वर्णों में विभक्त
• ब्राह्मण
• क्षत्रिय
• वैश्य
• शूद्र
2- फाहियान के अनुसार - "गुप्तकाल में अस्पृश्य वर्ग था - अंत्यज तथा चांडाल।"
3- ह्वेनसांग के अनुसार - "शूद्रों की दशा में सुधार हुआ था। शूद्र बहुधा खेतिहर कृषक थे। वे सैनिक वृत्ति करते थे तथा उन्हें रामायण और महाभारत पढ़ने का भी अधिकार था।"
4- भूमि अनुदान प्रक्रिया के कारण "कायस्थ" जाति का उदय हुआ। "याज्ञवल्क्य संहिता" में पहली बार कायस्थ शब्द का उल्लेख मिलता है।
5- इस काल में वर्णव्यवस्था के आधार पर न्याय किया जाता था।
• मनुस्मृति के अनुसार चोरी करने वाले ब्राह्मण को सबसे अधिक दंड तथा शूद्र को सबसे कम दंड दिया जाता था जबकि हत्या करने पर शूद्र को सर्वाधिक दंड तथा ब्राह्मण को कम दंड मिलता था।
• ब्राह्मण मृत्युदंड से मुक्त था।
6- स्त्रियों का उपनयन संस्कार बंद हो गया था।
7- चांडाल समाज में सबसे निचला स्थान प्राप्त था। इनका मुख्य कार्य मछली मारना, शिकार करना और मांस बेचना था।

@विन्ध्येश्वरी

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