Friday, 23 April 2021

परतंत्रता प्रिय मनुष्य


मनुष्य स्वभावतः परतंत्रता प्रिय है।वह बातें तो स्वतंत्रता की करता है लेकिन परतंत्रता उसे सुखकर लगती है,सुरक्षा का भान करवाती है। उसने स्वयं को एक घर में कैद कर लिया और सुरक्षित अनुभव करने लगा।वह जिसे भी प्रेम(भौतिक स्तर)करता है उसे कैद करने की कोशिश करता है।पत्नी अगर पति को प्रेम करने लगी तो पति को शाम ढलने से पहले घर आ जाना चाहिए,किसी अन्य स्त्री से बात नहीं करना चाहिए।पति भी स्त्री के विषय में यही सोंचता है।माता-पिता पुत्र-पुत्री के विषय में यही सोंचते हैं।मनुष्य जब पशु-पक्षियों को प्रेम करता है तब उन्हें पिंजरे या जंजीर में जकड़ देता है।अगर वह ईश्वर को मानता है तो उन्हें भी मंदिर/मस्जिद/चर्च/गुरुद्वारा बना सलाखों के पीछे डाल देता है।आजादी का स्वाद न खुद चखा,न औरों को चखने दिया।@विनय नमन🙏🏻🧘🏻‍♂️

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