Thursday, 26 June 2025

ब्राह्मण होना पाप है

रावण को सीता का हरण करना था उसने वेष बनाया ब्राह्मण का। हनुमानजी को राम का भेद लेना हुआ उन्होंने वेष बनाया ब्राह्मण का। कालनेमी को हनुमानजी को उनसे मार्ग से भटकाना हुआ उसने वेष बनाया ब्राह्मण का। कर्ण को परशुराम जी से धनुर्वेद का ज्ञान लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। श्रीकृष्ण को कर्ण को छलना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। श्रीकृष्ण सहित भीमादि पांडवों को छल से जरासंध का वध करना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। वरुण को राजा हरिश्चंद्र की परीक्षा लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। विश्वामित्र को राजा हरिश्चंद्र को छलना को हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। विष्णु को राजा बलि को छलना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। अश्विनी कुमारों को च्यवन ऋषि की पत्नी सत्यवती की परीक्षा लेना हुआ वेश बनाया ब्राह्मण का। अपने अज्ञातवास के दौरान पांडव सहित कुंती तथा द्रौपदी ने कई बार ब्राह्मण का वेश धारण किया। जब जब किसी को कोई क्रूर कर्म करना हुआ उसने ब्राह्मण का वेश धारण किया। क्यों? क्योंकि ब्राह्मण नाम है एक भरोसे का। ब्राह्मण नाम है एक विश्वास का। ब्राह्मण नाम है सत्य का। ब्राह्मण नाम है धर्म का। ब्राह्मण नाम है त्याग, तप, शील और संयम का। इसलिए उसके नाम का फायदा उठाना बहुत आसान था। उसके वेश से, उसके नाम से लोगों को मूर्ख बनाना आसान था। उसके नाम से लोगों को ठगना आसान था। आज भी यही हो रहा है। हालांकि अब ब्राह्मण नाम ब्रांड नहीं धब्बे जैसा लगता है। ब्राह्मण होना पाप जैसा लगता है। आखिर हम इतने कुकर्मी हैं? हमने सदियों तक मौर्यवंशी सम्राटों, चंवर वंशी क्षत्रिय राजाओं (अब चमार), अहीर-यदुवंशी राजाओं, महार-कहार-कुर्मी-पासी-मल्लाह-निषाद जाति के राजाओं, नाई जाति के राजाओं, डोम राजाओं, नागवंशी राजाओं, हैहय वंशी राजाओं, जाट-गुर्जर-पाल-परमार-प्रतिहार राजाओं, चोल-चालुक्य-वेंगी-वर्मन वंशी राजाओं, सूर्यवंशी, चंद्रवंशी राजाओं का शोषण किया? उन्हें दबाया कुचला, पीड़ित और प्रताड़ित किया। वे 80-90% और हम 3-5%। उनके हाथ में सेना, उनके हाथ में शस्त्र, उनके हाथ में खजाना, उनके हाथ में ताकत, उनकी बिरादरी का बल और अल्पसंख्यक होते हुए भी हमने एक धोती, चुटिया, जनेऊ, तिलक धारण कर उन्हें लूट लिया? बर्बाद कर दिया है? तबाह कर दिया? और इस कदर तबाह किया वे अपना सिर ही न उठा सके? अब इतिहास का बदला लिया जा रहा है? अफसोस। लेकिन, लेकिन रुको या तो तुम इतने अंधे, मूर्ख, बकलोल, निर्बुद्धि, कायर, निर्बल थे कि तुम्हें हमारा कमीनापन दिखा नहीं अथवा हम लोग वाकई इतने काबिल, योग्य, सामर्थ्यवान थे कि तुम लोग चकरघिन्नी की तरह सहस्राब्दियों तक नाचते रहे, नट-मरकट की तरह अथवा यह अब तक सबसे बड़ा झूठ है, षड्यंत्र है, धोखा है।

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