Friday, 27 June 2025

क्या सच में ब्राह्मणों ने जाति बनाया?

समाज में कुछ थ्योरियां प्रचलित है कि 1- "ब्राह्मणों ने समाज को जातियों में बांट दिया।" 2- "ब्राह्मणों ने शूद्रों को लूट लिया।" 3- "उन्होंने शुद्रों को पढ़ने नहीं दिया।" मेरा प्रश्न यह है कि 1- इस सिद्धांत के पक्ष में क्या कोई साक्ष्य है? आप में से जितने भी पढ़े लिखे बुद्धिमान, विद्वान, वैज्ञानिक लोग हों कोई शास्त्रीय, अभिलेखीय, शिलालेखीय, ताम्रपत्रीय प्रमाण ले आना जिसमें ब्राह्मणों द्वारा विभाजित जातियों का उल्लेख हो, उस क्रूर ब्राह्मण का नाम हो, मैं पहला ब्राह्मण होऊंगा जो उसका पुतला दहन कर ब्राह्मणत्व का त्याग करूंगा। वर्ण की बात मत करना क्योंकि ब्राह्मणों ने अपनी कुटिलता से उसे ईश्वरीय घोषित कर दिया है। उसमें उनकी कोई खतां नहीं है। भगवान जाने उसकी बात। 2-दूसरा प्रश्न यह है कि जब मुट्टी भर (3-5%) अधनंगे तिलक, चुटिया, जनेऊ, खड़ाऊं और पोथी-पत्तरा धारी ब्राह्मण समाज को बांट रहे थे तब सिकंदर जैसे विश्व विजेता को धूल चटाने वाले, मछली से तेल निकाल देने वाले, लट्ठ को तेल पिलाकर चिकना करने वाले, धरती का सीना चीर कर सोने की फसल निकाल देने वाले वीर बांकुरे, उनके राजा, उनकी सेना, उनके हथियार, क्या कर रहे थे? क्यों बंटने दिया समाज को? 3- तीसरा प्रश्न यह है कि उन ब्राह्मणों के पास ऐसा क्या था कि वे इतनी आसानी से 80-90% प्रतिशत धाकड़, जांबाज, बुद्धिजीवी आबादी को बांटने में सफल हो गये? 4-चौथा प्रश्न जब मनुवादी ब्राह्मण फर्जी (?) मनुस्मृति लिखकर समाज को तोड़ रहे थे, आप लोगों को दबाने, कुचलने, सताने की साजिश रच रहे थे तब आप क्या कर रहे थे? कहाँ सो रहे थे? 5- ऐसा कैसे हो सकता है कि 3-5% प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी वाले लोग 80-90% बहुसंख्यक आबादी वाले लोगों को पढ़ने न दें? क्या आपके पास इतनी अक्ल, क्षमता, साहस, संसाधन नहीं था कि आप अपनी समानान्तर शिक्षण व्यवस्था खड़ी कर सकें, अपनी पाठशाला, अपनी भाषा, अपना पुस्तक, अपना ज्ञान, अपना वेद, अपना शास्त्र रच सकें? 6- या इन सबमें आपकी भी मिलीभगत थी अथवा यह अब तक सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा है? @ डॉ.विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी प्रवक्ता भूगोल जी आई सी दोस्तपुर सुलतानपुर

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