पाश्चात्य दृष्टिकोण से भूगोल शब्द का प्राचीनतम प्रयोग इरेटास्थनीज द्वारा लगभग दो सौ छिहत्तर ई. पू. माना जाता है। यानी आज से लगभग दो हजार दो सौ उन्यासी वर्ष पूर्व। भारत में वर्तमान संदर्भ में भूगोल की शुरुआत स्वतंत्रता के बाद से माना जा सकता है। लेकिन भारत और भूगोल का नाता आजादी के बाद से नहीं बहुत प्राचीन काल से है।
श्रीमद्भागवत महापुराण के पंचम स्कंध के बीसवें अध्याय के श्लोक संख्या अड़तीस में भूगोल शब्द का प्रयोग किया गया है।
एतावाँल्लोकविन्यासो मानलक्षणसंस्थाभिर्विचिन्तितः कविभिः स तु पञ्चाशत्कोटिगणितस्य भूगोलस्य तुरीयभागोऽयं लोकालोकाचलः॥ (श्रीमद्भागवत महापुराण पंचम स्कंध बीसवां अध्याय श्लोक अड़तीस)
अर्थात् विद्वानों ने प्रमाण, लक्षण और स्थिति के अनुसार सम्पूर्ण लोकों का इतना ही विस्तार बतलाया है। यह समस्त भूगोल पचास करोड़ योजन है।
दरअसल पंचम स्कंध में न केवल भूगोल शब्द का प्रयोग है अपितु ब्रह्मांड, विविध भुवनकोश, द्वीप (महाद्वीप), वर्ष (या देश), विविध महाद्वीपों में के राजाओं, द्वीपों में स्थित पर्वतों, नदियों, वृक्षों और प्रमुख नृजातियों का, उनकी पूजा पद्धतियों का आदि का भी वर्णन है।
सनातन धर्म के मान्यतानुसार श्रीमद्भागवत का कालक्रम श्रीकृष्ण भगवान के समय (भगवान श्रीकृष्ण आज से पांच हजार एक सौ पच्चीस वर्ष पूर्व गोलोक गमन करते हैं) का माना जाता है। इस आधार पर सम्पूर्ण विश्व में भूगोल शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग भारत में हुआ। आधुनिक विद्वत मतानुसार श्रीमद्भागवत का समय लगभग सोलह सौ से दो हजार वर्ष पुराना ठहराया जाता है।
क्रमशः………
सादर
@विनय नमन
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