Friday, 29 May 2020

भारत में साम्प्रदायिकता के जन्म का कारण एवं प्रसार का क्रमबद्ध चरण (आजादी से पहले)


भारत में साम्प्रदायिकता के जन्म का कारण एवं प्रसार का क्रमबद्ध चरण (आजादी से पूर्व )-
1- 1857 में हिंदू-मुस्लिम एकता के कारण प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का विकट रूप (यहीं से अंग्रेज धार्मिक रूप बांटो और राज करो की नीति अपनाते हैं।
2- मुस्लिमों की अवहेलना और हिंदुओं को प्रोत्साहन।
3- 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद तथा कांग्रेस द्वारा स्वतंत्रता संघर्ष के कारण हिंदुओं को दुश्मन मानने तथा मुस्लिमों को प्रोत्साहन देने की शुरुआत 
4- 1887 में लार्ड डफरिन द्वारा सैय्यद अहमद खां एवं राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद को कांग्रेस का विरोध हेतु प्रोत्साहित करना
5- 1905 में प्रशासनिक एवं भाषायी आधार पर बंगाल विभाजन (जबकि असली उद्देश्य बंगाल में स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर करना, लेकिन आधार सांप्रदायिक)
6- 1906 आगा खां के नेतृत्व में एक मुस्लिम शिष्टमंडल का लार्ड मिंटो से मिलना एवं राजभक्ति के पुरस्कार स्वरूप सरकारी पदों पर मुस्लिमों को वरीयता का आग्रह
7- 1907 में मुस्लिम लीग की स्थापना
8- 1909 में मार्ले मिंटो द्वारा सांप्रदायिक निर्वाचन की शुरुआत
9- 1909 में पंजाब हिंदू महासभा का गठन
10- 1915 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा का गठन
11- 1916 में कांग्रेस - लीग समझौते का पार्श्व प्रभाव (समझौते में कांग्रेस ने धार्मिक आधार पर आरक्षण एवं निर्वाचन स्वीकार किया)
12- 1919 में कांग्रेस द्वारा धार्मिक आधार पर खिलाफत आंदोलन का समर्थन
13- 1920 में शुद्धि आंदोलन (हिंदू से मुसलमान हुए लोगों की हिंदू धर्म में पुनः वापसी) एवं तंजीम व तबलीग आंदोलन (शुद्धि आंदोलन के विरोध में)
14- 1928 में "नेहरू रिपोर्ट" का पृथक निर्वाचन (सांप्रदायिक निर्वाचन) के मुद्दे पर लीग द्वार विरोध
15- 1932 में रैमजे मैकडोनाल्ड का सांप्रदायिक पंचाट (मुस्लिमों, दलितों आदि को पृथक निर्वाचन अधिकार)
16- 1937 में रहमत अली द्वारा पृथक पाकिस्तान की अवधारणा
17- 1937 के केंद्रीय विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी बहुमत, इससे मुस्लिम लीग में घबराहट
18- यहीं मुस्लिम लीग के उग्र सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत
19- 1939 में जिन्ना की मांग - कांग्रेस स्वयं को हिंदू तथा मुस्लिम लीग को मुस्लिमों का संगठन घोषित करे
20- 1940 में धार्मिक जनसंख्या के आधार पर देश के विभाजन की अवधारणा
21- 16 अगस्त 1946 मुस्लिम लीग का प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस
22- 14 अगस्त 1947 सांप्रदायिक आधार पर देश का विभाजन
23- कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण कारण
  • 18 वीं शदी के विभिन्न धार्मिक सुधार आंदोलनों का पार्श्व प्रभाव
  • 1905 - 1918 के मध्य उग्रवादी दल की रणनीति - गणेश उत्सव, शिवा जी उत्सव आदि
  • विभिन्न आंदोलनों के दौरान वंदेमातरम गाना, भारत माता की अभिकल्पना, देवी देवताओं की शपथ आदि
  • भारतीय इतिहास लेखन की दोषपूर्ण परंपरा (मध्यकाल को मुगलकाल या इस्लाम काल तथा उसके पहले हिंदू काल के रूप में विभाजन)
  • आर्थिक असमानता एवं पिछड़ापन तथा शिक्षा की कमी(तत्कालीन समय में सभी वर्ग ख़ासकर मुस्लिम लोग शिक्षा की कमी के कारण प्रायः आर्थिक रूप से पिछड़े रहते थे जिससे उनमें धार्मिक उन्माद आसानी से पैदा किया जा सकता है)
@विन्ध्येश्वरी

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