दरअसल उनकी पोस्ट थी - "इस समय नौतपा के दौरान गर्मी इसलिये ज्यादा पड़ती क्योंकि पृथ्वी सूर्य से अधिक निकट होती है।" मैंने उन्हें उपसौर और अपसौर के बार में बताया। इसी दौरान अचानक मेरे दिमाग में एक बात कौंधी - "अद्भुत है प्रकृति की लीला।" क्या है यह लीला? आइये देखते हैं।
खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 15 करोड़ किमी है। 3 जनवरी (उपसौर- Perihelion की स्थिति में) को पृथ्वी सूर्य के सर्वाधिक निकट यानि 14 करोड़ 7 लाख 98 हजार 70 किमी होती है। यह स्थिति दिसम्बर के बाद 14 दिन तक रहती है। इस दौरान उत्तरी गोलार्द्ध यानि विषुवत रेखा से उत्तर (जहाँ हम लोग हैं) वाला भाग आम दिनों की अपेक्षा 7% (यानि 2.3' से.) अधिक तापमान प्राप्त करता है।
ठीक इसके विपरीत 4 जुलाई (अपसौर-Aphelion की स्थिति में) को पृथ्वी सूर्य के सर्वाधिक दूर यानि 15 करोड़ 20 लाख 97 हजार 700 किमी होती है। यह स्थिति जून के बाद 14 दिन तक रहती है। इस दौरान उत्तरी गोलार्द्ध यानि विषुवत रेखा से उत्तर (जहाँ हम लोग हैं) वाला भाग आम दिनों की अपेक्षा 7% (यानि 2.3' से.) कम तापमान प्राप्त करता है।
इससे पहले हम प्रकृति के प्रबंध कौशल को देखें एक सामान्य सा सिद्धांत समझ लेते हैं -
पृथ्वी की परिक्रमण गति (जिसमें पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है) के कारण सूर्य की किरणें मकर रेखा (आस्ट्रेलिया के पास) पर सीधी और कर्क रेखा (भारत वाले भाग) पर तिरछी पड़ती हैं। मकर रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ने के कारण यहां गर्मी होती है। जबकि कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें तिरछी पड़ने के कारण यहां ठंडी पड़ती है।
ध्यातव्य यह है कि दक्षिणी गोलार्द्ध (विषुवत रेखा के दक्षिण वाले भाग) में जल अधिक है। जबकि उत्तरी गोलार्द्ध (विषुवत रेखा के उत्तर वाले भाग) में स्थल अधिक है। जल देर से गर्म और देर से ठंडा होता है, इससे वहां तापमान सामान्य बना रहता है। जबकि स्थल भाग जल्दी ठंडा और जल्दी गर्म होता है, इस कारण यहां गर्मी या ठंडी दोनों अधिक पड़ती है।
अब प्रकृति की कारीगरी देखते हैं।
कायदे से जब सूर्य कर्क रेखा पर चमक रहा हो तब भारत वाले भाग में गर्मी अधिक पड़ती और मकर रेखा वाले भाग पर ठंड ज्यादा लेकिन इसी समय अपसौर के कारण सूर्य पृथ्वी से सर्वाधिक दूर होता है जिससे उत्तरी गोलार्द्ध 7% (2.3'c) कम तापमान प्राप्त करता है जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध 7% अधिक तापमान प्राप्त करता है। फलतः "जून-जुलाई के महीने में तापमान संतुलन बना रहता है। यदि ऐसा नहीं होता तो हमें और अधिक गर्मी सहनी पड़ती।"
इसी प्रकार जनवरी में जब सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर तिरछी पड़ रही हैं, उत्तरी गोलार्द्ध में ठंड अधिक होता और दक्षिणी गोलार्द्ध में गर्मी। लेकिन उपसौर के कारण सूर्य पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है। फलतः "दिसंबर - जनवरी में भी पूरी पृथ्वी पर तापमान संतुलन बना रहता है। यदि ऐसा न होता तो हमें और अधिक ठंड झेलना पड़ता।"
©विन्ध्येश्वरी

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