माता का पद संसार में सर्वाधिक उच्च कहा गया है। है भी। मैं थोड़ी सी धृष्टता करते हुए सद्पत्नी को भी लगभग माँ के बराबर रखने की वकालत करता हूँ। वजह यह है कि अगर-
1- माँ ने हमें अपने कोख में नौ महीने पाला और टट्टी-पेशाब में लोटकर हमें बड़ा किया तो पत्नी उसके साथ ऐसा ही करने वाले अपने माता-पिता को छोड़कर एक पराये पुरुष के साथ चली आयी। उसने अपनी उस मिट्टी, उन संगी-साथियों को छोड़ा जिसमें वह पली-बढ़ी और खेली कूदी। मुझे लगता है कि यह त्याग उसे माँ के बरक्स ही खड़ा करता है।
2- माँ अपनी संतान के लिये सिवाय काम-संबंध बनाने के बाकी वो सारे कार्य करती है। नहलाना-धुलना, वस्त्र धुलना, खाना पकाना - खिलाना, पढ़ना-लिखना आदि। पत्नी माँ द्वारा छोड़े गये इस एक कार्य सहित और भी सारे कार्य करती है। इससे भी पत्नी का दर्जा माँ के समानांतर ही हो जाता है।
3- माँ अपनी संतान से बेहद दर्जे का प्यार करती है। एक स्त्री माँ बनकर स्त्रीत्व की पराकाष्ठा या कहें कि प्रेम की ऊंचाई को पार करती है। पत्नी थोड़ा सा इस मामले में माँ से पीछे रह जाती है। वह अपने पति को वैसा प्रेम नहीं कर पाती जैसा वह अपनी संतान को करती है। लेकिन इसके लिये वह दोषी नहीं है। पति दोषी है। एक सदपत्नी तो अपना पूरा समर्पण पति को देती है किंतु पति ठहरा उथला गड्ढा़ वह प्रेम के जरा से अति बहाव से ही भर जाता है और पत्नी का प्रेम उसके ऊपर से बहकर निकल जाता है। पत्नी का प्रेम पति की आत्मा तक नहीं पहुंच पाता। इसी कारण वह अधूरी रह जाती है। किंतु जब वह संतानवती होती है, वह अपने अधूरे किंतु लबालब भरे प्रेम को अपनी संतान पर उड़ेल देती है और फिर वह और उसका प्रेम परिपूर्ण हो जाता है। मेरा मानना है कि अगर पति पत्नी के मध्य माँ और पुत्र सा प्रेम हो जाये तो दुनिया स्वर्ग हो जाये। फिर संसार में सिर्फ प्रेम ही प्रेम बचेगा।
4- एक सद्पत्नी एक माँ की तरह ही अपने पति के जीवन में सुख-दुख, जय-पराजय आदि की संगिनी होती है। उसके जीवन को बनाने-संवारने में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करती है।
अस्तु मेरा तो मानना है कि एक पत्नी को माँ का दर्जा भले न दिया जाये किंतु माँ के समानांतर एक प्रतिष्ठित जगह जरूर मिलनी चाहिये। माँ, माँ होती है और पत्नी, पत्नी। दोनों की त्याग और महत्ता अद्वितीय, अवर्णनीय और अतुलनीय है। हम माँ को सम्मान तो देते हैं लेकिन एक पत्नी अपने सम्मान और गरिमा के लिये हमेशा जूझती और गुहार करती दिखती है। इसलिये उसे उसका हक मिलना चाहिए।
आज ही के दिन मेरे जीवन में एक सद्पत्नी के रूप में आपका आगमन मेरे जीवन की सुंदरतम घटना थी। मुझे नहीं पता कि मैं कितना आपका साथ निभा पाया लेकिन आपने काफी साथ निभाया। उसके लिये आपको और पराअंबा भगवती, आदि शक्ति को अशेष आभार धन्यवाद। आप सदैव स्वस्थ, सुखी और प्रसन्न रहें।
@विनय नमन 🙏🙏🙏🧘♂️🧘♂️🧘♂️
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