Tuesday, 6 February 2018

बाल अपराध

बाल अपराध :कारण एवं प्रकार

* मानव समाज में व्यवस्था और सुरक्षा बनाये रखने के लिए वहा की परिस्थितियां और परम्परा आदि के साथ-साथ वहा के विधान के आधार पर कुछ नियम और कानून बनाये जाते है . इनको तोड़ने वाला व्यक्ति अपराधी कहलाता है।
* अपराध और नैतिक पाप में अंतर है।
* अपराध वह कृत्य जिसके लिए राज्य दंड डे सकता है।
* बाल -अपराध से तात्पर्य है किसी स्थान विशेष के नियमो के अनुसार एक निश्चित आयु से कम के बच्चे द्वारा किया जाने वाला अपराध।
* भारतीय विधान धारा 83 के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु वाले नासमझ बालको को अपराधी नहीं नहीं माना जाता।
*जुनेवाईल जस्टिस एक्ट 1986 के अनुसार बाल/किशोर अपराधी की अधिकतम आयु 16 वर्ष है।
* सामान्य रूप से बाल अपराधी अवयस्क अर्थात 18 वर्ष से कम माना जाता है।
* बाल -अपराध के कुछ उदहारण :चोरी ,झगड़ा,और मारपीट,मद्यपान ,यौन अपराध, आत्महत्या ,हत्या, धोखा ,बेईमानी,/जालसाजी ,आवारागर्दी,तोड़-फोड़, छेड़खानी आदि।
* बाल -अपराध के कारण :
-आनुवंशिकता
-शारीरिक संरचना
-भग्न परिवार/परिवारों में टूटन
-अशिक्षित माता-पिता
-पक्षपात -परिवार , समाज
-अनैतिक परिवार
-सौतेली माँ
-बुरे साथी/संगत
-सामाजिक कुप्रथाए
-निर्धनता
-बालश्रम/नौकरी
-गंदी और घनी बस्तियां
-बुद्धि (कभी कभी मंदबुद्धि तो कभी तीव्रबुद्धि बाल-अपराध भी पाए जाते है) 
-आवश्यकता /इच्छापूर्ति न होने पर
-मनोविकृति
-सही दिशा में मनोरंजन का आभाव
-कुसमयोजन की समस्या
-संवेगात्मक अस्थिरता
-कुंठा
-विद्यालयीन कारण : विद्यालय की स्थिति , नियंत्रण का आभाव, मनोरंजन व रोचक प्रणालियों का अभाव , परीक्षा की उचित प्रणाली का अभाव।

* क्रो एवं क्रो के अनुसार -" किशोरापराध के पीछे आत्मचेतना और स्वार्थ जैसे तत्व होते है। क्योंकि आत्मचेतना के कारण बालक अपनी इच्छाओं की तुरंत पूर्ति  करना चाहता है।

* बाल -अपराध का उपचार व रोकथाम : 
परिक्षण काल/प्रोबेशन में रखना- 14 वर्ष से कम उम्र के बालापराधि को प्रोबेशन की देखरेख में रख दिया जाता है और सुधारने के लिए मार्गदर्शन दिया जाता है।

सुधार-विद्यालय/सुधार- गृह इनमें 14 -15 वर्ष तक के बाल -अपराधियों को लगभग 5 वर्ष तक रखा जाता है। कई राज्यों में ऐसे आवासीय विद्यालय भी है जहाँ 16 से 21 वर्ष तक 5 साल तक बाल अपराधी को रखकर पढाया-लिखाया जाता है।

कारावास - ऐसा तब किया जाता है जब बाल-अपराधी उम्र में अधिक और अपराध में गंभीर है।

परिवार की भूमिका- वातावरण अच्छा रखना,उचित मांगो और जेबखर्च की सीमा पूर्ति तथा मार्गदर्शन ,नियंत्रण और नज़र रखना।

विद्यालय में कार्य- योग्य शिक्षक , प्रेम और सहानुभूति , उत्तम वातावरण , व पुस्तकालय , स्वतंत्रता , सुविधा व ध्यान। 
*समाज व राज्य की भूमिका : - बालकों /विद्यार्थियों को राजनीती से दूर रखना . मनोरंजन की स्वस्थ व्यवस्था . गन्दी बस्तियों को समाप्त कर अच्छा वातावरण बनाना . बालश्रम रोकना।

मनोवैज्ञानिक उपचार - बाल अपराधी का विश्लेषण , मनोवैज्ञानिक जाँच, निर्देशन एवं उपचार , साक्षात्कार , खेल चिकित्सा , साइको ड्रामा।

विशेष-हरलोक आदि वैज्ञानिक बताते है की समाज विरोधी व्यव्हार वयसंधि में पाया जाता है . जो लगभग 11 या 12 वर्ष की अवस्था होती है . 13 -14 वर्ष की अवस्था में समाज विरोधी व्यव्हार चरमसीमा पर होता है .

समाज विरोधी व्यव्हार -दुसरे व्यक्तियों के प्रति अरुचि संगठन के व्यव्हार का विरोध दुसरे व्यक्तियों की आशाओं के विरुद्ध जानबूझकर कार्य दुसरो को सताने में आनन्द ,, आदि 

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