Friday, 2 February 2018

1991 के आर्थिक सुधार कार्यक्रमों का प्रभाव

प्रश्न - 'वर्तमान भारत की तस्वीर 1991 में अपनाये गये आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की परिणति है।' इसकी सफलताओं और असफलताओं को दृष्टिगत रखते हुए इस कथन की समीक्षा कीजिये।

उत्तर - कोई भी परिवर्तन अचानक नहीं होता। इसी प्रकार 1991 से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से परिवर्तन का दौर शुरू हो चुका था। किंतु यह समय एक निर्णायक मोड़ था। इसके पहले देश ने पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से काफी विकास किया था लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की बंद प्रकृति और संरक्षणवादी नीतियों के कारण आशानुरूप पर्याप्त विकास नहीं हो पाया था। इस कारण 1991 में एल पी जी (लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन) माॅडल अपनाया गया।
इसके तहत भारतीय अर्थव्यवस्था का द्वार विश्व और निजी क्षेत्रों के लिये खुल गया। भारत सरकार ने अपनी नीतियों में काफी ढील दिया। जिसके तहत करों में छूट तथा उन्हें तर्कसंगत बनाना, आसान ऋण उपलब्ध कराना, सरल लाइसेंसिंग प्रणाली, मूलभूत ढांचागत सुविधा उपलब्ध कराना आदि शामिल है।
इन कार्यक्रमों से कई सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव पड़े।
सकारात्मक प्रभाव -
* देश के आर्थिक विकास की रफ्तार (4.1%के स्तर से 7-8%) में वृद्धि।
* जी डी पी में वृद्धि।
* प्रति व्यक्ति आय (1991 में 144 $ से 2016 में 1709 $) में वृद्धि।
* प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि।
* देश में उन्नत तकनीकी और नवाचारों का प्रवेश।
* सेवा क्षेत्र में प्रभावी वृद्धि।
* ढांचागत अवसंरचना में विकास।
* लोगों के जीवन स्तर में सुधार।
* भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक ढांचे में बदलाव।
इन महत्त्वपूर्ण सकारात्मक बदलावों के अलावा कुछ नकारात्मक प्रभाव भी पड़े-
* गैर समावेशी विकास।
* कृषि क्षेत्र की उपेक्षा।
* पर्यावरणीय अवनयन।
* अमीर और गरीब के मध्य खाई गहरी।
उपर्युक्त तथ्यों के आलोक में कहा जा सकता है कि वर्तमान भारत की तस्वीर के कई आयाम 1991 के आर्थिक सुधार कार्यक्रमों के बाद उभरे हैं। एक प्रकार से यह समय भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज क्रांतिकारी साबित हुआ। एक तरफ जहां इसके कई सकारात्मक प्रभाव पड़े वहीं दूसरी ओर यह नकारात्मक प्रभावों से अछूता नहीं है।

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