प्रश्न- पिछले कुछ वर्षों के दौरान नाबालिगों द्वारा किए गए जघन्य अपराध अत्यंत चिंता का विषय है। इस बारे में किए गए उपायों के अप्रभावी होने के कारणों का उल्लेख कीजिए। अपनी ओर से कुछ प्रभावी उपाय सुझाएं। (जी.एस. द्वितीय प्रश्न पत्र)
उत्तर- पिछले कुछ वर्षों में नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले चर्चित जघन्य अपराध जैसे - निर्भया कांड, हरियाणा के एक स्कूल में कक्षा 11 के एक छात्र द्वारा कक्षा तीन के एक लड़के की हत्या, मुंबई में 12 वर्षीय किशोर द्वारा 70 साल की वृद्धा को चाकू मारना आदि हैं। यह घटनाएं इस बात की द्योतक हैं कि समाज का सबसे सुकोमल मस्तिष्क किस तरह गलत दिशा में जा रहा है। यद्यपि इस अपराध को रोकने के लिए सरकार द्वारा कई उपाय किए गए हैं जैसे -
* जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट,
* बाल सुधार गृह,
* जुवेनाइल जस्टिस एक्ट आदि
किंतु यह उपाय प्रभावी नहीं सिद्ध हो पा रहे हैं क्योंकि तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर कई समस्याएं हैं जैसे-
* भारतीय दंड संहिता की धारा 83 के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु का नाबालिग अपराधी नहीं है।
* बालिग होने की आयु में विरोधाभास है। उदाहरणार्थ भारत सरकार और यू एन के अनुसार बालिग होने की उम्र 18 है जबकि ज्यादातर बाल अपराधी 18 से कम आयु के होते हैं अर्थात कानूनी तौर पर नाबालिग किंतु बायोलॉजिकल तौर पर बालिग।
* यदि बाल अपराधी 17 वर्ष 11 माह का हुआ तो तकनीकी आधार पर वह नाबालिग हुआ अर्थात वह सजा से बच जाएगा।
* बाल अपराधियों को कठोर दंड ना देकर बाल सुधार गृह भेज दिया जाता है जिससे अन्य बाल अपराधियों के मन में अपराध के प्रति भय नहीं उत्पन्न हो पाता।
बाल अपराध अपने आप में एक गंभीर समस्या है इसे रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:-
* बालिग होने की आयु सीमा को अपराधियों के लिए संशोधित किया जाना चाहिए।
*प्राथमिक कक्षाओं से लेकर कम से कम हाई स्कूल तक नैतिक शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए।
* समाज- परिवार और माता- पिता को इस दिशा में जागरुक किया जाना चाहिए।
* बच्चों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ना चाहिए।
* सरकार को क्राइम रजिस्टर बनाना चाहिए जिसमें नाबालिग अपराधी का पूरा विवरण हो तथा उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
* अच्छा कार्य करने वाले बच्चों को पुरस्कृत करने का दायरा और बढ़ाना चाहिए इसे गांव शहर जिला और प्रदेश स्तर पर भी किया जाना चाहिए।
* उपेक्षित बालकों की शिक्षा दीक्षा और पालन पोषण का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए।
उत्तर- पिछले कुछ वर्षों में नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले चर्चित जघन्य अपराध जैसे - निर्भया कांड, हरियाणा के एक स्कूल में कक्षा 11 के एक छात्र द्वारा कक्षा तीन के एक लड़के की हत्या, मुंबई में 12 वर्षीय किशोर द्वारा 70 साल की वृद्धा को चाकू मारना आदि हैं। यह घटनाएं इस बात की द्योतक हैं कि समाज का सबसे सुकोमल मस्तिष्क किस तरह गलत दिशा में जा रहा है। यद्यपि इस अपराध को रोकने के लिए सरकार द्वारा कई उपाय किए गए हैं जैसे -
* जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट,
* बाल सुधार गृह,
* जुवेनाइल जस्टिस एक्ट आदि
किंतु यह उपाय प्रभावी नहीं सिद्ध हो पा रहे हैं क्योंकि तकनीकी और व्यावहारिक स्तर पर कई समस्याएं हैं जैसे-
* भारतीय दंड संहिता की धारा 83 के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु का नाबालिग अपराधी नहीं है।
* बालिग होने की आयु में विरोधाभास है। उदाहरणार्थ भारत सरकार और यू एन के अनुसार बालिग होने की उम्र 18 है जबकि ज्यादातर बाल अपराधी 18 से कम आयु के होते हैं अर्थात कानूनी तौर पर नाबालिग किंतु बायोलॉजिकल तौर पर बालिग।
* यदि बाल अपराधी 17 वर्ष 11 माह का हुआ तो तकनीकी आधार पर वह नाबालिग हुआ अर्थात वह सजा से बच जाएगा।
* बाल अपराधियों को कठोर दंड ना देकर बाल सुधार गृह भेज दिया जाता है जिससे अन्य बाल अपराधियों के मन में अपराध के प्रति भय नहीं उत्पन्न हो पाता।
बाल अपराध अपने आप में एक गंभीर समस्या है इसे रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:-
* बालिग होने की आयु सीमा को अपराधियों के लिए संशोधित किया जाना चाहिए।
*प्राथमिक कक्षाओं से लेकर कम से कम हाई स्कूल तक नैतिक शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए।
* समाज- परिवार और माता- पिता को इस दिशा में जागरुक किया जाना चाहिए।
* बच्चों को रचनात्मक कार्यों से जोड़ना चाहिए।
* सरकार को क्राइम रजिस्टर बनाना चाहिए जिसमें नाबालिग अपराधी का पूरा विवरण हो तथा उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
* अच्छा कार्य करने वाले बच्चों को पुरस्कृत करने का दायरा और बढ़ाना चाहिए इसे गांव शहर जिला और प्रदेश स्तर पर भी किया जाना चाहिए।
* उपेक्षित बालकों की शिक्षा दीक्षा और पालन पोषण का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए।
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