Tuesday, 7 October 2025
पंचतत्वों में असंतुलन
पंचतत्वों में असंतुलन
स्थूल रूप से प्रकृति का सृजन, संचालन, संतुलन आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी तत्वों से है। लेकिन लोभ, लालच, तृष्णा, सुख की खोज में अंधा मनुष्य इन्हीं पंच तत्वों में विकृति उत्पन्न कर रहा है। सबसे पहले उसने पृथ्वी तत्व को खोदना प्रारंभ किया। कृषि और खनिजों की खोज यही है। वह खोद-खोदकर पृथ्वी के गर्भ में छिपे रत्नों को बाहर निकलता रहा। पृथ्वी को खोखला करता रहा। आज भी कर रहा है।
उसने जल में हानिकारक विषैले अपशिष्ट पदार्थो के निक्षेपण द्वारा जल तत्व को प्रदूषित किया। कार्बनिक ईंधनों का दहन कर पृथ्वी के गर्भ में दबे कार्बन को वायुमंडल में मुक्त कर दिया। इससे वायु तत्व विकृत हुआ। परमाणु सहित विधि शस्त्रास्त्र का निर्माण, बिजली का निर्माण, एलपीजी एवं सीएनजी गैसों को संशाधित करना अग्नि तत्व में विकृति का कार्य कर रहा है। सौर ऊर्जा को नियंत्रित करना अग्नि तत्व की विकृति को और उद्दीप्त करेगा। विगत एक शताब्दी में मनुष्य ने आकाश तत्व को भी हठात विकृत करना प्रारंभ कर दिया है।
विज्ञान की अंधी दौड़ में वह जीवन के लिये आवश्यक हर घटक को तहस-नहस कर रहा है। और इसे वह अपनी उपलब्धि मानता है, विकास मानता है।
आगामी समय यह अंधी दौड़ रुकने वाली नहीं है। वर्तमान में विश्व की कुल जनसंख्या लगभग 8.1 अरब है। जिसमें 1.64 अरब चार-पहिया गाड़ियाँ हैं यानी प्रति 1000 व्यक्तियों पर 203 कार। वहीँ लगभग 70.6 करोड़ दो-पहिया वाहन हैं। दो-पहिया वाहनों का औसत प्रति 1000 व्यक्ति 87। इसके विपरीत वर्त्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 1.45 अरब है जिसमें 5 करोड़ लोगों के पास चार-पहिया गाड़ियाँ हैं यानी प्रति 1000 व्यक्तियों पर 34 कारें। जबकि लगभग 26 करोड़ लोगों के पास दो-पहिया वाहन हैं। दो-पहिया वाहनों का औसत प्रति 1000 व्यक्ति 178।
अगर वैश्विक और भारत के संदर्भ में बढ़ते जनसंख्या के अनुपात में प्रतिवर्ष केवल 1% की दर से वृद्धि माना जाये तो आगामी 25 वर्षों में (सन 2050 तक) विश्व में चार-पहिया गाड़ियों की संख्या 2.49 अरब (254 वाहन प्रति 1000 व्यक्ति), दो-पहिया वाहनों की संख्या 1.07 अरब (109 प्रति 1000 व्यक्ति) जबकि भारत में चार-पहिया गाड़ियों की संख्या 7.17 करोड़ (43 कार प्रति 1000 व्यक्ति), दो-पहिया वाहनों की संख्या 37.3 करोड़ (222 वाहन प्रति 1000 व्यक्ति) हो जाएगी। इन वाहनों को बनाने, इनके चलने योग्य सड़कें बनाने, खनिज तेल खनन एवं प्रसंस्करण आदि को मिलाकर केवल निजी वाहनों से इससे वैश्विक तापन में 0.5℃-1.0℃ की वृद्धि संभावित है जो धरती को खासकर के विषुवत रेखीय प्रदेशों और उपोष्ण प्रदेशों जैसे भारत आदि को और गर्म अनुभव कराने वाला होगा। तापमान में 0.5℃-1.0℃ की वृद्धि अनुभव में 5% सदृश लगेगा।
इसका तात्पर्य है गर्मियां और अधिक गर्म होने वाली हैं। संभवतः आगामी वर्षों में भारत के आंतरिक भागों में पारा 55 से 60 के बीच पहुँचने वाला है। इससे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्य सर्वाधिक प्रभावित होंगे। आने वाले वर्षों में यहाँ गर्मी बढ़ेगी तथा वर्षा की मात्रा कम होगी। इसका अर्थ है कि इन राज्यों में मरुस्थलीकरण में वृद्धि होगी। जबकि तटवर्ती प्रदेशों और राजस्थान आदि में चरम मौसमी घटनाएँ जैसे चक्रवात और अत्यधिक वृष्टि अधिक होंगी। वहीँ पर्वतीय राज्यों में भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं में लगभग 60% से 70% वृद्धि हो जाएगी। व्यापक जलवायविक परिवर्तन से फसल चक्र दुष्प्रभावित होगा, फसलोत्पादन घटेगा, जलवायुजन्य और दिनचर्याजन्य अनजानी बीमारियाँ उत्पन्न होंगी। इन सबका व्यापक असर आम आदमी पर पड़ने वाला है।
इसके साथ लोगों को पक्के मकान की भी आवश्यकता है। वैश्विक तापन में इसका भी अहम् योगदान होने वाला है। हमको लग रहा है कि हम और हमारा विज्ञान बहुत तरक्की कर रहा है लेकिन हम गर्त में जा रहे हैं। बहुत सम्भावना है कि हम समूची मानवता का विनाश करने जा रहे है। कारण वही है पञ्चतत्वों का असंतुलन।
बोनस प्वाइंट
*लगे हाथ आपको बता दें कि श्रीमद्देवीभागवत, श्रीमद्भागवत, भविष्य पुराण आदि में लिखा है कि कलिकाल के अंत में 12 सूर्य एक साथ चमकेंगे। मतलब चरम ग्लोबल वार्मिंग की भविष्यवाणी भी हमारे ग्रंथों में है। अभी बता दे रहा हूँ फिर यह मत कहना कि पहले नहीं बताया। भारत के पंडित, पुजारी या पोंगापंथी लोग तब बतातें जब कोई घटना घट जाती है। वे बाद में कहते हैं कि ऐसा हमारे शास्त्रों में लिखा है। पहले ही बता दे रहा हूँ। ऐसा लिखा है। और किसी की माँ ने दूध नहीं पिलाया है कि इसे रोक सके। ग्लोबल वार्मिंग होकर रहेगा। 12 सूर्य एक साथ चमकेंगे।
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