दुनिया मर रही है और गिद्धों को लूट-खसोट कर सहेजने की पड़ी है। कथित तौर पर रावण के एक लाख पुत्र और सवा लाख नाती हुआ करते थे। उसने दशों दिशाओं और स्वर्ग लोक तक को जीत लिया था, चला गया। सिकंदर जो विश्व विजेता बनने निकला था, बीच रास्ते ही मर गया। नेपोलियन का भी सपना विश्व विजय ही था, वह भी सेंट हेलेना द्वीप पर भूख-प्यास से तड़प कर मरा। राम और कृष्ण जो कि भगवान माने जाते हैं, राम सरयु नदी में डूब कर मरे। कृष्ण को बहेलिये ने मार दिया। इच्छा मृत्यु का वरदान पाने वाले भीष्मपितामह बाणों से बींध दिये गये। राज्य की प्राप्ति के लिये बंधु-बांधवों को मार देने वाले पांडव हिमालय पर भूख-प्यास से तड़प कर मरे।
ये वे लोग हैं जो अपने आप में लगभग अजेय थे। तुम्हारी क्या औकात है? किस दिन के लिये, किसके लिये लोगों को लूट रहे हो। यह धरती, अकूत धन-सम्पत्ति किसी की नहीं हुई है। तुम्हारी भी नहीं होगी। कल्पना करो कि सारा देश समाप्त हो जाये और लूटने वालों कहीं एक कोने में तुम पड़े हो। आइने के सामने खड़े होने पर खुद का ही चेहरा भूतिया सा नजर आयेगा तुम्हें। तुम पागल होकर मर जाओगे। तुम्हारा लूटा हुआ माल, कुमार्ग से अर्जित सारा वैभव-साम्राज्य धरा रह जायेगा।
"सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आयेगी।
न सोना काम आयेगा न चांदी आयेगी॥"
अगर जमीर बचा है, तो महज मुनासिब दाम लो। लोगों की मदद करो। ताकि खुद को ही मुंह दिखाने लायक बच सको। मैं तुम्हें जहन्नुम, दोजख या नर्क का वास्ता नहीं दे रहा, तुम्हें अपने जमीर का वास्ता है। तुम्हें अपनी आत्मा का वास्ता। मत बेंचो चंद सिक्कों और नोटों के लिये अपनी आत्मा। उस पर बड़ा बोझ हो जायेगा।
@विनय नमन 🙏🧘♂️
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