पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम कारण, परिणाम
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वर्तमान समय पेट्रोल और डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं। इस पर हर कोई हैरान, परेशान और अलग अल दृष्टिकोणों से विवेचना कर रहे हैं। निष्पक्ष भाव से इसके विविध तथ्य इस प्रकार हैं -
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वर्तमान समय पेट्रोल और डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं। इस पर हर कोई हैरान, परेशान और अलग अल दृष्टिकोणों से विवेचना कर रहे हैं। निष्पक्ष भाव से इसके विविध तथ्य इस प्रकार हैं -
कारण :-
* क्रूड ऑयल के दामों में वृद्धि :- 2014 के मुकाबले 2018 में क्रूड ऑयल प्रति बास्केट दाम में लगभग 30% की वृद्धि हो चुकी है। यह 2014 में लगभग 50 डॉलर/बैरल था जो अब लगभग 80 डॉलर /बैरल हो चुका है। इस दाम में वृद्धि का कारण ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध, वेनेजुएला के पेट्रोलियम उत्पादन में कमी और विश्व पेट्रोलियम बाजार पर सउदी अरब के एकाधिकार की महत्त्वाकांक्षा है।
* डॉलर के तुलना में रूपये के मूल्य में कमी:- क्रूड ऑयल के दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है अतः डॉलर की मांग में वृद्धि हो गयी। इस कारण रूपये की मांग में कमी हुई। जिससे इसके मूल्य में कमी आ गयी। इसी बीच फेडरल बैंक ने अपने ब्याज दर को बढ़ा दिया जिससे निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपनी पूंजी निकालना शुरू कर दिया। इसका नतीजा डॉलर की मजबूती और रूपये की कमजोरी हुई।
* विश्व बाजार के अनुसार पेट्रोलियम के दामों का निर्धारण:- केंद्र सरकार के एक निर्णय के बाद पेट्रोलियम कंपनियां अब दैनिक आधार पर पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटा-बढ़ा रही हैं। चूंकि विश्व बाजार में क्रूड ऑयल के दामों में बेतहाशा वृद्धि जारी है अतः भारतीय बाजार में भी इसके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
* मुनाफा कमाने की इच्छा / चालू खाता घाटा कम करना :- 2014 से पहले क्रूड ऑयल के दाम में वृद्धि के बावजूद सरकार सब्सिडी के माध्यम से दामों को नियंत्रित रखती थी। लेकिन 2014 में सत्ता परिवर्तन तथा क्रूड ऑयल के दाम में कमी के बाद सरकार ने चालू खाते का घाटा कम करने के लिये घटते दामों का लाभ जनता को नहीं दिया। नतीजतन जो चालू खाता घाटा 2014 से पहले लगभग 10% था वह अब लगभग 3% है। अब जबकि दामों में वृद्धि हो रही है तब भी सरकार अपने लाभ को छोड़ना नहीं चाहती।
* प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि :- 2014 में प्रति व्यक्ति आय प्रति वर्ष लगभग 65000 था जो इस 2017 - 18 में बढ़कर लगभग 1 लाख 3 हजार हो चुकी है। अतः सरकार लोगों की क्रय शक्ति का लाभ अधिक राजस्व जुटाने में करना चाहती है।
परिणाम:-
हानि:- डीजल पेट्रोल के दामों में वृद्धि से निम्नलिखित नुकसान हो सकता है -
* मंहगाई में वृद्धि :- डीजल - पेट्रोल के दाम बढ़ने से परिवहन शुल्क में वृद्धि होगी। इससे माल-ढुलाई लागत में वृद्धि होगी और मंहगाई भी इसी अनुपात में बढ़ेगी।
* औद्योगिक उत्पादन में कमी:- ईंधन की लागत बढऩे से या तो उत्पादक उत्पादन कम करेंगे या फिर तैयार माल के कीमत में वृद्धि करेंगे। दोनों ही स्थितियों में महंगाई में इजाफा होगा।
* आॅटो सेक्टर में मंदी:- पेट्रोलियम के दामों में वृद्धि के कारण लोग नयी गाड़ियां खरीदना कम करेंगे। इससे आटो सेक्टर में मंदी का दौर शुरू होगा। जिससे रोजगार में कमी होगी।
* कृषि लागत में बढ़ोत्तरी :- डीजल के दाम बढ़ने से कृषि लागत में भी इजाफा होगा। इसके कारण फल, सब्जी और खाद्यान्नों के मूल्य में भी वृद्धि होगी।
* चालू खाता और व्यापार घाटा में वृद्धि :- पेट्रोलियम के दामों में अधिक वृद्धि के कारण सरकार के व्यापार घाटा में भी इजाफा होगा। इसके कारण रूपये के मूल्य में भी कमी होगी। यदि राजनीतिक दबाव के कारण सरकार टैक्स घटा देती है तब चालू खाता घाटा भी बढ़ेगा। चालू खाता घाटा बढ़ने से सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यय में कटौती करेगी।
लाभ:- पेट्रोलियम के दामों में वृद्धि से कुछ लाभ भी मिलेगा-
* सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
* हरित ऊर्जा के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
* कार्बन उत्सर्जन में कमी होगी।
* हरित ऊर्जा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
* यह एक अच्छा अवसर है जब ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त किया जा सकता है।
हानि:- डीजल पेट्रोल के दामों में वृद्धि से निम्नलिखित नुकसान हो सकता है -
* मंहगाई में वृद्धि :- डीजल - पेट्रोल के दाम बढ़ने से परिवहन शुल्क में वृद्धि होगी। इससे माल-ढुलाई लागत में वृद्धि होगी और मंहगाई भी इसी अनुपात में बढ़ेगी।
* औद्योगिक उत्पादन में कमी:- ईंधन की लागत बढऩे से या तो उत्पादक उत्पादन कम करेंगे या फिर तैयार माल के कीमत में वृद्धि करेंगे। दोनों ही स्थितियों में महंगाई में इजाफा होगा।
* आॅटो सेक्टर में मंदी:- पेट्रोलियम के दामों में वृद्धि के कारण लोग नयी गाड़ियां खरीदना कम करेंगे। इससे आटो सेक्टर में मंदी का दौर शुरू होगा। जिससे रोजगार में कमी होगी।
* कृषि लागत में बढ़ोत्तरी :- डीजल के दाम बढ़ने से कृषि लागत में भी इजाफा होगा। इसके कारण फल, सब्जी और खाद्यान्नों के मूल्य में भी वृद्धि होगी।
* चालू खाता और व्यापार घाटा में वृद्धि :- पेट्रोलियम के दामों में अधिक वृद्धि के कारण सरकार के व्यापार घाटा में भी इजाफा होगा। इसके कारण रूपये के मूल्य में भी कमी होगी। यदि राजनीतिक दबाव के कारण सरकार टैक्स घटा देती है तब चालू खाता घाटा भी बढ़ेगा। चालू खाता घाटा बढ़ने से सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के व्यय में कटौती करेगी।
लाभ:- पेट्रोलियम के दामों में वृद्धि से कुछ लाभ भी मिलेगा-
* सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा।
* हरित ऊर्जा के विकास को बढ़ावा मिलेगा।
* कार्बन उत्सर्जन में कमी होगी।
* हरित ऊर्जा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
* यह एक अच्छा अवसर है जब ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त किया जा सकता है।
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
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