Friday, 25 May 2018

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग :-
आने वाला युग आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (ए आई) का युग होगा। आज कई ऐसे रणनीतिक, औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्र हैं; जैसे, सुरक्षा, वित्त, निर्माण, ई-वाणिज्य, आवाज पहचान और परिवहन; जिनमें ए आई का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है।

*सूचना एवं दूरसंचार में :-
ए आई के प्रयोग से सरकार को अनेक क्षेत्रों में सूचना एवं दूरसंचार प्रौद्योगिकी को सशक्त करने में मदद मिली है। इससे निश्चित रूप से विकास बढ़ा है, एवं ढांचागत बाधाओं को पार करने में भी मदद मिली है।

*न्याय और न्यायालय में :-
अगर हम भारत के सभी न्यायालयों के मुकदमों की बात करें, तो ए आई की मदद से हमें यह जानने में सुविधा हो सकती है कि किस कानून के किस भाग के अंतर्गत सबसे ज्यादा मुकदमें आ रहे हैं। ऐसा होने पर सरकार उस कानून में ही सुधार करने के बारे में सोच सकती है। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड इस दिशा में काम भी कर रहा है।

*विकास परियोजनाओं पर निगरानी रखने में :-
राष्ट्रीय सूचना केंद्र ने जीपीएस वाले स्मार्टफोन से स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालय निर्माण योजना पर निगरानी रखने का काम शुरू कर दिया है। ए आई सॉफ्टवेयर से शौचालय निर्माण की जगह और लाभार्थी की पहचान की जा सकती है। अलग-अलग फोटो में से नकली दावों का पता लगाया जा सकता है। इस प्रकार असली दावेदारों की पहचान करके उन्हें प्रतिपूर्ति दी जा सकती है।

*सार्वजनिक बुनियादी ढांचों के रखरखाव के पूर्वानुमान में।

*आपदा के दौरान की प्रतिक्रिया से लेकर स्वास्थ्य सेवा में सुरक्षात्मक उपाय करने के लिये।

*आर्थिक घोटालों पर नकेल कसने के लिये।

*कृषि क्षेत्र में:-
हमारे किसानों को अगर मौसम, मृदा, भू-जल, फसल-पैटर्न, किस समय क्या उगाया जाए, कब खाद डाली जाए, सिंचाई की जाए एवं कटाई आदि की जानकारी मिलती रहेगी, तो वे अधिक ऊपज प्राप्त कर सकेंगे।

*एआई की फेस रेकगनिशन या चेहरा पहचान तकनीक से अपराधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

ए आई से आशंकाएं और चुनौतियां –

* ए आई के कारण रोज़गार के अनेक अवसर खत्म हो जाएंगे।
(लेकिन यह पूरी तरह से सच नहीं है। उल्टे, यह काम करने की मानवीय क्षमता में कई गुणा संवर्द्धन करेगा। यह अकल्पनाशील एवं दोहराए जाने वाले कामों की जिम्मेदारी लेकर मनुष्य के मस्तिष्क को अधिक सृजनात्मक कार्यों के लिए मुक्त कर सकेगा। इसके विकास के साथ ही ए आई के क्षेत्र में ही रोज़गार के अनेक अवसर मिलेंगे।)

* ए आई का समुचित उपयोग तभी किया जा सकता है, जब इसके लिए सही और पर्याप्त डाटा मिल सके। डाटा सुरक्षा और निजता की रक्षा करते हुए इसे उपलब्ध कराने के बारे में जस्टिस श्रीकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है।

* ए आई के ऐसे एल्गोरिदम विकसित करने होंगे, जो पक्के और मापयोग्य हों। साथ ही निरीक्षण के लिए पारदर्शी भी हों ताकि इनके दुरूपयोग से बचाया जा सके।

*एआई और मानवीय जीवन के अंतर्विभाजक के रूप में एक कानूनी ढांचा भी तैयार करना होगा।

ए आई के लिए नीति निर्माण हेतु समितियाँ:-
1- आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के प्लेटफार्म और डाटा संबंधी समिति:- इस समिति का फोकस आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के लिए मॉडल, उसका ढांचा और इसके लिए आवश्यक प्लेटफार्म विकसित करने पर होगा।

चेयरमैन - आइआइटी खड़गपुर के प्रोफेसर पीपी चक्रवर्ती।
सदस्य - नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेंटर की महानिदेशक सुश्री नीता वर्मा।

2- प्रमुख क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के लिए नेशनल मिशन की पहचान समिति।

चेयरमैन -  आइआइटी बीएचयू के प्रोफेसर राजीव संगल। कमेटी में दस सदस्य।

3- तकनीकी क्षमताओं की मैपिंग समिति:-
सभी सेक्टरों के लिए किस प्रकार की नीतिगत जरूरतें हैं इस पर काम करेगी। इसके अलावा स्किलिंग और री-स्किलिंग व इस क्षेत्र में आर एंड डी की आवश्यकताओं पर काम करेगी।

चेयरमैन -  नासकॉम के प्रेसिडेंट आर चंद्रशेखर इस कमेटी के चेयरमैन होंगे।
अतिरिक्त छह सदस्य।

4- साइबर सुरक्षा, सेफ्टी, लीगल और एथिकल मुद्दों की समिति।
चेयरमैन - आइआइटी भिलाई के निदेशक प्रोफेसर रजत मूना।

नवाचार:-
पुणे में सी-डैक, ए आई तकनीक पर लगातार काम कर रहा है। जनवरी 2018 में अनेक उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योगों से जुडे़ विशेषज्ञों ने भारत में ए आई के विकास पर एक कार्यशाला में विचार-विमर्श किया।

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