प्रश्न - "1857 की क्रांति के बिना भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष किस प्रकार से भिन्न होता?" चर्चा कीजिए। (200 शब्द, जी एस-1)
उत्तर- 1857 की क्रांति का व्यापक प्रभाव भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष पर पड़ा। इसके अभाव में बाद का संघर्ष निम्नलिखित प्रकार का हो सकता था-
* इस क्रांति के बाद देश में कंपनी शासन का अंत हो गया तथा क्राउन शासन की शुरुआत हुई। यह कमोवेश लोकतांत्रिक शासन था। यहीं से प्रेरणा ग्रहण कर स्वतंत्रता सेनानियों ने लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष को आगे बढ़ाया।इस क्रांति के अभाव में स्वतंत्रता संघर्ष का स्वरूप कम से कम लोकतांत्रिक नहीं होता।
* इस क्रांति ने देश को एकजुट करने का प्रयास किया। इससे बाद के स्वतंत्रता संघर्ष का स्वरूप अखिल भारतीय, सर्व वर्गीय सहयोग, समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष हुआ। उइस क्रांति के न होने से देश में क्षेत्रवाद, जातिवाद, वर्गवाद, धर्मवाद, असमानता, छुआछूत आदि की जड़ता नहीं टूटती। फलतः भारतीयता की भावना का विकास नहीं होता और देश का स्वतंत्रता संघर्ष दम तोड़ देता या सामंतवादी रूप में प्रकट होता।
* इस क्रांति से देशवासियों को एहसास हुआ कि अंग्रेजों को हराया जा सकता है जिससे स्वतंत्रता प्राप्ति की इच्छा प्रबल हुई अन्यथा बाद के सेनानी भी अपने आप को दीन-हीन समझते और गुलामी की दशा चिरकालीन होती।
* इस क्रांति के कारण अंग्रेजों को भी एहसास हुआ कि भारतीयों की स्वतंत्रता लालसा को बहुत दिनों तक दबाकर नहीं रखा जा सकता। अतः उन्होंने कांग्रेस के रूप में सेफ्टी वाल्व का निर्माण कर स्वतंत्रता संघर्ष की अवधि को बढ़ा दिया।
अंततः कहा जा सकता है कि इस क्रांति के अभाव में स्वतंत्रता संघर्ष की दशा-दिशा एकदम भिन्न होती।
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